28 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
हुए बिना खुशहाली की राह पर चलते हैं और * इस अनर्गल दावे का विरोध करने के लिए समस्त मानव सभ्यता को एकजुट होना चाहिए।
जर्मन राष्ट्र की ओर से किया गया दावा अन्य राष्ट्रों का अपमान है। परन्तु भारत के लिए यह विशेष रूप से आपत्तिजनक है। यह भारत के लोगों की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं के विरुद्ध है और उन्हें हराने और नेस्तनाबूद करने की चाल है। भारत अपना शासन स्वयं करने की आकांक्षा रखने वाले लोगों का राष्ट्र है और उसकी यह एक महत्वाकांक्षा है कि सभी प्रकार की कठिनाइयों के बावजूद वह न केवल यह दर्जा प्राप्त करके रहेगा बल्कि इसे बनाए रखने का प्रयास भी करेगा।
जब जर्मनी इस बात पर जोर देता है कि पूरे विश्व में केवल नॉर्डिक नस्ल का ही वर्चस्व होना चाहिए और अन्य नस्ल वाला दूसरा राष्ट्र उसका अधीनस्थ हो, तो यह अन्य सभी नस्लों के लिए एक चुनौती है।
भारत के लोगों की आकांक्षाओं और महत्वाकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए और उनके व जर्मन लोगों के बीच बुनियादी मतभेद को ध्यान में रखते हुए आदर्श भारत जर्मनी की चुनौती का सामना करने से विमुख नहीं हो सकता और उसे करारा जवाब देते हुए अपनी नियति तक पहुंचने के अपने अधिकार के संरक्षण के प्रति तैयारी प्रदर्शित नहीं कर सकता।
इस युद्ध से जुड़ी इन्हीं सब बातों को देखते हुए इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी को यह कहने में कोई झिझक नहीं है कि यह एक युद्ध है जिसका भारत के लोगों को अपने स्वयं के हित में समर्थन करना चाहिए और ग्रेट ब्रिटेन को आगे बढ़ने में सहायता करनी चाहिए।
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खोखला वाक्य
इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी को ज्ञात है कि अन्य राजनैतिक दलों को भी कुछ झिझक है। परन्तु यह झिझक सिद्धांतों पर आधारित नहीं बल्कि चालबाजियों पर आधारित है। वे इंग्लैंड की जरूरत को भारत के लिए एक अवसर बना देना चाहते हैं। मुस्लिम लीग और हिन्दू महासभा “जरूरत की इस घड़ी” का लाभ उठाते हुए साम्प्रदायिक संतुलन को अपने पक्ष में करने के लिए भारतीय संविधान में संशोधन कराना चाहते हैं। इस वर्गगत दष्ष्टिकोण पर विचार करना अनावश्यक है।
सबसे महत्वपूर्ण वर्ग, वह वर्ग है जो इंग्लैण्ड की जरूरत की घड़ी को भारत के
* यहां कुछेक शब्द अपठनीय हैं ।