97. कांग्रेस का अस्पृश्यों को हटाने का प्रयास - Page 476

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सामाजिक सम्मेलन की गतिविधियों का उल्लेख किया जिसके बारे में हम जानते हैं कि कांग्रेस ने इस संस्था को अपना वार्षिक सत्र कांग्रेस के पण्डाल में आयोजित करने हेतु केवल इस लिये स्वीकृति प्रदान नहीं की थी क्योंकि श्री तिलक ने धमकी दी थी कि यदि सोशल कांफ्रेस पार्टी के प्रयोग की स्वीकृति दी जाने की स्थिति में वह उसे जला देंगे।

17 सितम्बर 1931 को संघीय संरचना समिति (फेडरल स्ट्रक्चरल कमेटी) में श्री गाँधी ने दोषारोपण करते हुए निम्न शब्द कहे :

कांग्रेस अस्पृश्यों के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए डॉ. अम्बेडकर को प्राप्त गौरव के अनुरूप साथ निभायेगी। वे कांग्रेस को उतने ही प्रिय हैं जितने भारत के एक छोर से दूसरे छोर तक कोई संस्था है। इसलिए, मैं और अधिक विशेष प्रतिनिधित्व का अत्यन्त सशक्तता से विरोध कर सका।

वास्तव में, यह कुछ और नहीं था बल्कि अस्पृश्यों के विरुद्ध लड़ाई हेतु श्री गाँधी एवं कांग्रेस की घोषणा थी। वह योजना बना रहे थे कि अस्पृश्यां को एक तरफ कर दिया जाये तथा हिन्दुओं, मुसलमानों और सिक्खों के मध्य एक समझौता करा कर उनकी समस्याओं को समाप्त कर दिया जाए। इस कार्य को गोपनीयता से किया गया था। यह जानते हुए कि यह एक विद्वेषपूर्ण कदम है, मैंने खड़े होकर कहा, मैं कहना चाहता हूँ कि मैंने मामला पहले से अल्पसंख्यक समिति के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है। लेकिन मैं अत्यन्त दृढ़तापूर्वक यह कहना चाहता हूँ कि जो भी इसका दावा करता है तो उसे मैं अपने हिस्से में से नहीं दे सकता। मैं इसे पूर्णतया सुस्पष्ट बनाना चाहता हूँ। ‘‘इस मुद्दे पर श्री गाँधी मौन रहे तथा हिन्दू, मुस्लिम एवं सिखों के मध्य समझौते के संबंध में विचार-विमर्श करते रहे। श्री गाँधी इस समझौते में सफलता प्राप्त करने में असफल रहे। विचार-विमर्श करते रहे कि सफलता प्राप्त करने में असफलता इस कारण से हुई उन्होंने यह कहते हुए खेद प्रकट किया कि प्रतिनिधियों का प्रतिनिधित्व त्रुटिपूर्ण था क्योंकि सभी प्रतिनिधियों को मनोनीत सरकार द्वारा किया गया था। यह अप्रत्यक्ष रूप से मेरे द्वारा अस्पृश्यों के लिए किये गये प्रतिनिधित्व की विश्वसनीयता को चुनौती थी। श्री गाँधी इस बात पर दबाव डालते रहे थे कि वह दलित वर्गों के एकमात्र समर्थक हैं। श्री गाँधी की चुनौती के उत्तर में, मैंने कहा ‘‘यदि भारत के दलित वर्ग को इस सम्मेलन के लिये अपने प्रतिनिधियों के चयन का अवसर दिया जाता है तो उसमें मेरा ही नाम होगा। इसलिए मैं कहता हूँ कि यदि मैं यहाँ नामित हूँ या नहीं, मैं पूर्णतया अपने समुदाय की माँगों का प्रतिनिधित्व करता हूँ। अपने भाषण के दौरान मैंने उनको एक तार भी