98. मैं पराजयवादी मानसिकता में विश्वास नहीं करता। - Page 479

460 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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सन्देश

अनुसूचित जाति संघ पिछला आम चुनाव हार गया। इसकी हार के परिणामस्वरूप कुछ ने इसे छोड़ दिया है कुछ ने इसमें अपना विश्वास खो दिया। मैं इस पराजयवादी मानसिकता में विश्वास नहीं करता हूँ। संघ का ध्येय चुनाव जीतना नहीं है। संघ के लिये सीटों के जीतने का तात्पर्य एक प्रयोजन को पूर्ण करना है। इसका ध्येय जनता की सेवा करना है जिसके लिये यह स्थापित किया गया है जब तक यह समस्या रहेगी संघ किसी न किसी रूप में कार्यरत रहेगा।

संघ की हार का स्वागत किया जाना चाहिए। इस पराजय ने संघ में प्रविष्ट अत्यंत अवांछनीय तत्वों को बाहर निकालने में सहायता की है। जो लोग अभी संघ में रह गये हैं उनके ऊपर अत्यधिक उत्तरदायित्व आ गया है। उनके लिये मेरा संदेश है कि संघ की पराजय खराब मौसम में ध्वस्त हुए वृक्ष की भांति है, लेकिन यह निश्चित है कि वह जड़ों से मृत नहीं हुआ है।

हस्ता./-

बी.आर. अम्बेडकर

$सन् 1946 में हुये

1 : जय भीम : दिनांक 12, 1946

पुर्नर्मुद्रित : खौरमोडे़, खण्ड-8 पृष्ठ-48