99. हमारे विद्यार्थी सीखें एवं नेतृत्व करें - Page 480

461

(11)
v uq lwfp r
fn lEc
हमारे विद्यार्थी सीखें एवं नेतृत्व करें अखिल भारतीय अनुसूचित जाति विद्यार्थी संघ का 25-27 दिसम्बर,
1946 को होने वाले सम्मेलन के लिए
डॉ. अम्बेडकर का संदेश

‘आखिल भारतीय अनुसूचित जाति विद्यार्थी संघ’ का द्वितीय सम्मेलन 25 से 27 दिसम्बर, 1946 को नागपुर में संघ के लिए संविधान तैयार करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। इस संघ की नींव 12 मई, 1945 को बम्बई में प्रथम सम्मेलन के दौरान रखी गई थी।

डॉ. अम्बेडकर की नागपुर में होने वाले इस सम्मलेन में भाग लेने की इच्छा थी, परन्तु अपनी पूर्व व्यस्तता के कारण वह इसमें भाग नहीं ले सके। लेकिन उन्होंने भारत की अन्तरिम सरकार में विधि सदस्य श्री जोगेन्द्रनाथ मण्डल को नागपुर में होने वाले इस विद्यार्थी सम्मेलन में अध्यक्ष बनने का परामर्श दिया है।

यह सम्मेलन ऐतिहासिक महत्त्व का था। इसकी व्यवस्था अल्पावधि में की गई थी। 16 दिसम्बर, 1946 को स्वागत समिति का गठन किया गया था तथा वह सम्मेलन 25 से 27 दिसम्बर, 1946 को सम्पन्न हुआ। इस अल्प अवधि के बावजूद सम्पूर्ण भारत से प्रतिनिधियों के रूप में 3000 बाल विद्यार्थी एवं 500 बालिका विद्यार्थी उपस्थित हुए। लगभग तीस हजार प्रतिभागी इसमें सम्मिलित हुए थे। बम्बई, उत्तर प्रदेश, केन्द्रीय प्रदेश व ब्रार एवं मद्रास, बंगाल, हैदराबाद एवं दिल्ली के प्रतिनिधियों को नई कालोनी, नागपुर स्थित चौखमेला कन्याशाला में ठहराया गया था।

यह सम्मेलन कस्तूरचन्द पार्क के एक बड़े मैदान में अत्यन्त सज्जि़त पण्डाल में सम्पन्न हुआ था। इस सम्मेलन के अध्यक्ष श्री जोगेन्द्रनाथ मण्डल थे। 40 हजार व्यक्तियों की भारी भीड़ ने 25 दिसम्बर, 1946 के सायं 6.30 बजे नागपुर रेलवे स्टेशन पर उनका भव्य स्वागत किया था। ‘समता सैनिक दल’ एवं ‘मुस्लिम लीग गार्ड’ द्वारा उन्हें सलामी दी गई। उनका स्वागत अनुसूचित जाति संघ, मुस्लिम लीग के नेताओं एवं सरकारी अधिकारियों द्वारा भी किया गया था।