99. हमारे विद्यार्थी सीखें एवं नेतृत्व करें - Page 481

462 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय संदेश

‘‘2 वैस्टर्न कोर्ट,

नई दिल्ली,

20-12-1946

मेरे प्रिय गेदाम,

मुझे खेद है कि मैं अपनी अनेक पूर्व व्यस्तताओं के कारण आपको पहले पत्र लिखने में असमर्थ रहा।

मैं यह जानकर अत्यन्त प्रसन्न हूँ कि आपने अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ के अधिवेशन से अलग अखिल भारतीय अनुसूचित जाति विद्यार्थी संघ का अधिवेशन आयोजित करने का निर्णय लिया है। यह एक दूरदर्शी एवं विवेकशील निर्णय है, जिसके लिए मैं पूर्णतया सहमत हूँ।

मैंने माननीय जे.एन. मण्डल से बात की है। वह आपके सम्मेलन की अध्यक्षता करने हेतु निश्चित रूप से आ रहे हैं। मेरी इच्छा है कि मैं उपस्थित हो सकूँ। लेकिन दुर्भाग्यवश यह संभव प्रतीत नहीं हो रहा है। लेकिन मैं इस सम्मेलन की सफलता के लिए अपनी शुभ कामनायें भेज रहा हूँ। हमारे बच्चों को दो बातें सीखनी चाहियें। पहली तो यह सिद्ध करना होगा कि प्राप्त अवसरों के अनुसार वे योग्यता एवं क्षमता में किसी से भी कम नहीं हैं। दूसरा यह सिद्ध करना होगा कि उन्हें केवल व्यक्तिगत हित व प्रसन्नता को ही प्राप्त नहीं करना है बल्कि अपने समुदाय को स्वतंत्र कराने, सशक्त बनाने एवं सम्मनीय बनाने की दिशा में अग्रसर करना है। यदि सम्मेलन में हमारे विद्यार्थियों के मस्तिष्क में इन दो उद्देश्यों को बैठा दिया जाता है तो यह अपने अस्तित्व की सार्थकता को सिद्ध करेंगे। मुझे विश्वास है कि ऐसा ही होगा।

आदर सहित

भवदीय

बी.आर. अम्बेडकर’’ ख्1,

$टी.वी. गेदाम, महासचिव, केन्द्रीय प्रदेश एवं ब्रार, ‘अनुसूचित जाति विद्यार्थी संघ’

  1. छहाण्डे बी.डी., सम्मेलन की रिपोर्ट