464 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
की सेवा नहीं कर रहा होगा, यदि यह अपनी ऊर्जा को प्राथमिक या माध्यमिक शिक्षा के विस्तार जैसे सरल कार्य पर व्यय करेगा। भारत में अधिकतर प्रान्तों की सरकारें प्राथमिक शिक्षा के विस्तार की योजना बना रही हैं एवं भारत में अधिकतर जनता संतोष एवं कृतज्ञता भी अनुभव कर रही है। मेरा मानना है कि प्राथमिक शिक्षा का प्रसार हमें हमेशा उपेक्षित रखेगा। इससे मुझ में किसी प्रकार उत्साह जागृत तो नहीं होगा बल्कि मैं इसे मोहपाश में फँसाना मानता हूँ। मैं यह भूल नहीं सकता - मुझे खेद है कि अधिकतर लोग इस बात से भी अवगत नहीं है कि भारत में जाति प्रथा, उच्च एवं निम्न जाति के मध्य अन्तर ब्राहा्रण एवं गैर-ब्राहा्रण के मध्य अन्तर सैकड़ों वर्षों से चला आ रहा है तथा कई सदियों तक रहने वाला है तथा यह भेद ब्राहा्रण तथा गैर-ब्राहा्रणों के मध्य शैक्षणिक असमानता के कारण है। इस असमानता को केवल प्राथमिकत शिक्षा के विस्तार द्वारा नहीं मिटाया जा सकता। ब्राहा्रण एवं गैर-ब्राहा्रण के मध्य सामाजिक स्थिति में असमानता को शिक्षा की केवल ऐसी नीति को अपना कर मिटाया जा सकता है, जिसमें कुछ गैर-ब्राहा्रण उच्च शिक्षित होकर प्रतिष्ठित पदों पर बैठे ब्राहा्रणों के एकाधिकार को समाप्त कर देंगे। मेरी राय है कि प्रतिष्ठित पदों के लिये योग्य बनाने के आवश्यक स्तर तक गैर-ब्राहा्रणों को शिक्षित करने का कार्य राज्य द्वारा निष्पादित किया जाना चाहिये। यदि राज्य यह कार्य नहीं करता तो यह कार्य मराठा मन्दिर द्वारा किया जाना चाहिये।
यहाँ मैं एक और मुद्दे का वर्णन करना चाहूँगा। कुलीन वर्ग की तुलना में मध्यवर्गीय एवं निम्न वर्ग में कुछ विशेष त्रुटियाँ हैं तथा ये त्रुटियाँ समस्त संसार में उस विशेष वर्ग में पाई जाती हैं। मध्यवर्गीय के पास निम्न वर्ग की प्रगति को सहन करने की कुलीन वर्ग के समान उदारता नहीं है तथा इसके पास निम्न वर्ग का आदर्शवाद भी नहीं है। इससे मध्यवर्गीय को दोनों वर्गों का शत्रु बना दिया है। यह कुलीनता से उसकी उच्च हैसियत के कारण घृणा करता है। यह निम्न वर्गों से घृणा करता है क्योंकि वह नहीं चाहता कि निम्न वर्ग उन्नति कर उनके समान बन जाए। मराठा भारत में मध्यवर्गीय हैं एवं जिस किसी ने भी इनके साथ कार्य किया है, वे ये जानते होंगे कि उनमें उपरोक्त उल्लिखित त्रुटियाँ हैं। मराठों के पास उन्नति के दो मार्ग हैंः एक तो अपने से उच्च वर्ग में सम्मिलित हो जाएँ तथा निम्न श्रेणी को उस स्तर तक उन्नति करने से रोके या निम्न वर्ग में सम्मिलित हो जाएं तथा उस वर्ग को समाप्त कर दें जो इन दोनों वर्गों से उच्च है। एक समय था जब वे निम्न वर्ग में सम्मिलित हो गये थे। हाल ही में वे उच्च वर्ग में सम्मिलित हो गये हैं। मुझे यह कहना उचित नहीं लगता है कि उनके द्वारा अनुसरण किये जाने वाला कौन सा मार्ग उचित है। इसमें कोई संदेह नहीं है, कि दूसरों के साथ-साथ स्वयं मराठों का भाग्य उन दो मार्गों में से उनके द्वारा चयन किये जाने वाले मार्ग पर निर्भर करता है। उसे मराठों के नेताओं की बुद्धिमत्ता पर छोड़ दिया जाये जिसका अत्यधिक अभाव प्रकट होता है।
हस्ता./-
बी.आर. अम्बेडकर
- मराठा मन्दिर का विशेषांक मार्च 23, 1947