30 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
भारत के प्रति ब्रिटेन का सर्वप्रथम कर्त्तव्य भारतीय लोगों को अपने देश की रक्षा के लिए तैयार करने हेतु कदम उठाने का है।
भारत एक ऐसा देश है जिस पर चौतरफा हमले की संभावना है। इसके बावजूद भारत आज विश्व का सर्वाधिक संरक्षणहीन देश है। भूमि, समुद्री अथवा हवाई मार्ग से हमले का सामना करने के लिए इसके पास अपने कोई संसाधन नहीं हैं। अपनी रक्षा के लिए यह पूरी तरह नहीं, फिर भी काफी हद तक ब्रिटिश सेना, ब्रिटिश नौसेना और ब्रिटिश वायुसेना पर निर्भर है। गोलमेज सम्मेलन में इस बात पर सहमति हुई थी कि भारत की रक्षा को भारत की जिम्मेवारी माना जाना चाहिए, परन्तु इस सिद्धांत को कार्यरूप देने के लिए कुछ भी नहीं किया गया। सैन्य महाविद्यालय खोलने और अधिकारियों के ग्रेडों के भारतीयकरण के बारे में बहुत कुछ कहा जा चुका है। इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी का यह स्पष्ट अभिमत है कि भारतीयों को अपने देश की रक्षा का प्रशिक्षण देने के लिए कम से कम इतना तो किया जाना जरूरी है।
इसका सबसे महत्वपूर्ण भाग भारत के सभी लोगों के लिए जाति, वर्ग और पंथ के भेदभाव के बिना कतिपय आयु के आधार पर अनिवार्य सैन्य सेवा लागू करना है। कोई ऐसी नीति ही भारत के लोगों को अपने देश की रक्षा हेतु प्रशिक्षित करने में सफल हो सकती है।
भारत की जनशक्ति की सीमा अपार है। यदि इसे अपेक्षित सैन्य प्रशिक्षण दिया जाए, तो इसमें न केवल भारत की रक्षा करने का बल्कि पूरे ब्रिटिश साम्राज्य की रक्षा करने का सामर्थ्य है, चाहे आक्रमणकारी देश कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो। अतः यह अत्यंत आश्चर्य की बात है कि ब्रिटिश सरकार ने भारत के पुरुषों को राष्ट्रीय सुरक्षा हेतु प्रशिक्षण देने का कभी विचार नहीं किया। यह भी आश्चर्यजनक है कि जब युद्ध जीतना हो तो सरकार भारत के लोगों को सैनिक बनने के लिए बुलाती है और युद्ध समाप्त होते ही उन्हें नकारा बनाकर छोड़ देती है।
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अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण
ब्रिटिश सरकार भारतीय लोगों को सैन्य दृष्टि से युद्ध की तरह शांति के समय भी सुव्यवस्थित रखने के लिए तैयार क्यों नहीं है? यह प्रश्न चारों ओर पूछा जा रहा है। लोगों में व्याप्त भावना के अनुसार ब्रिटिशों द्वारा अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण लागू न करने का कारण यह है कि सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त भारतीय लोगों पर वे विश्वास नहीं कर सकते। इस संदेह को दूर करने के लिए कुछ किया जाना चाहिए। ब्रिटिश लोग यदि भारतीयों से मदद और सुरक्षा चाहते हैं, तो उन्हें भारत के लोगों पर विश्वास करना सीखना होगा और उन्हें सैन्य प्रशिक्षण सुलभ कराना होगा। विश्वास करने से ही विश्वास उत्पन्न होता है।