10. ग्रेट ब्रिटेन का समर्थन आवश्यक - Page 50

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इसी प्रकार स्थायी सेना में भर्ती भी सभी समुदायों के लिए खुली होनी चाहिए और बहादुर और गैर-बहादुर वर्गों के बीच का भेद समाप्त किया जाना चाहिए। अधिकारियों के पदों का भारतीयकरण समुचित और निष्पक्ष तरीके से किया जाना चाहिए।

इस समय केवल सम्पन्न घरों के लड़के ही नौसैनिक और सैनिक स्कूलों में प्रवेश ले सकते हैं इसलिए नहीं कि उनका शरीर सौष्ठव इसके लिए उपयुक्त है बल्कि इसलिए कि प्रशिक्षण की ऊंची लागत वहन करने के लिए पैसा उनके पास है। दूसरे शब्दों में, ब्रिटिश सरकार में भरोसा और विश्वास पैदा करने के उद्देश्य से सैन्य सेवा में उच्च पदों पर केवल सम्पन्न और विशेष रूप से चुने गए समुदायों का एकाधिकार समाप्त किया जाना चाहिए।

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साम्राज्य के भीतर भारत की प्रास्थिति

ब्रिटिशों को भारत के प्रति दूसरा कर्त्तव्य उसे इस बात का विश्वास दिलाना है कि ब्रिटिश साम्राज्य में उसका दर्जा क्या होगा। गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया एक्ट की उद्देशिका में ब्रिटिश संसद का यह कहना कि भारत का दर्जा अंततः एक उपनिवेश का होगा, द्वेष का कारण बन चुका है।

ब्रिटिश सरकार में अनेक लोगों के विश्वास को इस बात से गहरा धक्का लगा कि संसद को 1935 में औपनिवेशिक दर्जे की घोषणा पर औपचारिक स्वीकृति प्रदान करने से इंकार कर देना चाहिए था, जिसे लार्ड इरविन ने 1929 में अनौपचारिक परन्तु प्राधिकृत रूप से किया था। ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत का यह संदेह यथाशीघ्र दूर किया जाना चाहिए। भारत स्वेच्छा और हृदय से उन सिद्धांतों के लिए नहीं लड़ सकता। यदि वह आश्वस्त न हो कि इन्हीं सिद्धांतों का लाभ उसे युद्ध समाप्त होने पर मिलेगा।

इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी की यही वैचारिक स्थिति है। इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी इस वक्तव्य में दिए गए कारणों से युद्ध में ब्रिटिश सरकार की मदद करने के लिए महामहिम वायसराय द्वारा की गई अपील का समर्थन करती है।

इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी सहमत है कि यह शर्तें रखने का समय नहीं है। साथ ही इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी यह मानती है कि ब्रिटिश और भारतीय यह अच्छी तरह समझ लें कि वे किस उद्देश्य से लड़ रहे हैं और एक-दूसरे से क्या चाहते हैं। ख्1,

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1 विविध वृत्त : 17 सितम्बर, 1939