104. पावती शब्द का अर्थ - Page 491

472 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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अनुच्छेद 198 के खण्ड (2) में प्रयोग किये गये शब्द पावती के अर्थ पर विचार करने का मुद्दा है। क्या इसका अर्थ विधान परिषद् के सचिवालय या विधान परिषद् द्वारा पावती है? वस्तुतः अन्तर महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह परिसीमन अवधि, जो वित्त विधेयक के लिए चौदह दिन है, के प्रारम्भिक समय को निश्चित करती है। मामला भारत सरकार को अपना मत व्यक्त करने के लिए संप्रेषित किया गया था क्योकि आर.एल.ए. एवं बिहार के महाधिवक्ता के मतों में भिन्नता थी, आर.एल.ए. पहली एवं महाधिवक्ता दूसरी व्याख्या का समर्थन कर रहे थेः-

आर.एल.ए. अपने तीन तर्कों पर अवलम्बित हैं :-

  1. अनुच्छेद 198 की धारा (2) के अनुसार इसकी पावती से चौदह दिन

  2. अनुच्छेद 197 की धारा (2)(ख) तथा अनुच्छेद 198 की धारा (2) प्रयुक्त

में भाषा में अन्तर है

  1. यदि बिहार के महाधिवक्ता के आशय को यदि वैध मान लिया जाए

तो वित्त विधेयक के पास होने में विलंब संभव है।

आर.एल.ए. के प्रथम तर्क पर विचार करने पर मैं पाता हूँ कि उसके द्वारा निम्नलिखित मुद्दों को नोट न करने के कारण उसका तर्क अनुपयोगी है :

(1) आर.एल.ए. ने उसके द्वारा बिल की प्राप्ति’’ शब्द अनुच्छेद 198 की धारा 2 से लिए हैं और अपना तर्क तैयार किया है। उसका तर्क है कि ‘इसकी प्राप्ति’ शब्दों के प्रयोग से संविधान का आशय केवल उच्च सदन के सचिवालय द्वारा सम्प्रेषित पावती प्रदान करना है न कि सदन द्वारा वास्तविक रूप से प्राप्त करना है। परन्तु विधान परिषद् को उसकी अभिशंसा के लिए सम्प्रेषित जो धारा (2) में भी उल्लेखित है, शब्दों का पूरी तरह से प्रयोग करने में चूक गया है जो मतानुसार धारा के मुख्य सांकेतिक शब्द हैं। इसकी पावती शब्द अपने आप में बिल्कुल अनुचित है। उनका अर्थ विधान परिषद् को उसकी अभिशंसा के लिए सम्प्रेषित शब्दों के साथ उन्हें पढ़ने से निकलता है। इस प्रकार पढ़ने से इसका अर्थ सचिवालय द्वारा पावती से नहीं हो सकता।