474 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मैं मानता हूँ कि अति सिद्धान्तवादी भाषा के अन्तर पर आधारित तर्क का हल नहीं हो सकता। इसके लिए यह संभव है कि हम कहें कि अनुच्छेद 198 में आपका आशय 197 (2) (ख) के समान है तो आप इसका अनुसरण करते हुए इसकी भाषा में परिवर्तन कर दें जबकि आपने अनुच्छेद 197 (2) की भाषा में परिवर्तन किया है और दोनों की भाषा समान कर दें? इस तर्क के लिए मेरा उत्तर बहुत साधारण है। यह तर्क करना गलत है कि प्रत्येक मामले में भाषा की भिन्नता का अर्थ आशयों की भिन्नता है। इसके लिए पूरी तरह से स्वीकार्य अभिव्यक्ति है कि आशय वही हो सकता है चाहे उसे भिन्न शब्दों में अभिव्यक्त किया जाए। इस संबंध में मैं ‘क्रे’ के अधिनियम पर निम्नलिखित सार उद्धत करना चाहूँगा।
जैसाकि न्यायिक समिति ने केसमेंट बनाम फाल्टन ( i ) में कहा है परन्तु यद्यपि जैसा कि कहा गया है यह परिकल्पना सामान्यता की जाती है और निश्चित रूप से इच्छित की जाती है ‘‘कि अधिनियम बनाते समय हमेशा समान शब्दों का समान अर्थों के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए’’, फिर भी विधान में कई उदाहरण मिल जाएँगे कि किसी अर्थ को सम्प्रेषित करने के उद्देश्य से प्रयोग की गई भाषा में परिवर्तन किये गये परन्तु परिवर्तित भाषा से मूल आशय में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। आर.वी. बटले (को) में ब्लैक बर्न जे ने कहा है कि अधिनियम के शब्दों में परिवर्तन करें परन्तु प्रत्यक्षतया ऐसा कोई संदेह नहीं होना चाहिए जिससे यह लगे कि अर्थ परिवर्तन का कोई आशय है। लेकिन हम पाते हैं कि वास्तव में ऐसा जरूरी नहीं होता है जैसा कि ब्लैक बर्न जे ने हेडली बनाम पर्क (1) में अवलोकित किया है कि संसद, विधानमण्डल के अधिनियम तैयार करते समय हम देखते हैं कि शैली के अनुकूल अधिनियम सुधार करने तथा एक ही शब्द का बार-बार प्रयोग करने से बचने के लिए हम शब्दों को अक्सर बदल देते हैं। ‘‘ऐसे शब्दों का प्रयोग करने का आशय अर्थ में परिवर्तन करना नहीं है। इस प्रकार कि राइट (एम) में मेलिश एल.जे. ने कहा है कि निरस्त दिवालियापन अधिनियम, 1849 में प्रयोग भाषा से दिवालियापन अधिनियम, 1869 में परिवर्तन के संबंध में जिस किसी को भी वर्तमान अधिनियम की समझ है वह जानता है कि कई मामलों में पूर्व अधिनियमों की भाषा में परिवर्तन किया गया है जबकि कानून में कोई परिवर्तन करने का आशय नहीं हो सकता। महाधिवक्ता बी. ब्राडलाफ में यह तर्क था कि संसदीय शपथ अधिनियम, 1866, में अभिव्यक्ति शपथ Shall be made में made ं शब्द की व्याख्या की जानी चाहिए क्योंकि यह इसका अर्थ ‘ली’ शब्द से भिन्न है। परन्तु एम.आर. ब्रेट ने कहा, प्रस्तावना को पढ़ने एवं जिस ढंग से शब्द का प्रयोग किया गया है उससे मुझे ऐसा लगा कि 'Made' शब्द का निश्चित रूप से वही अर्थ है जो ली का है।