11. भारत का दो भागों में विभाजन रोकने के लिए सद्बुद्धि और राजनीतिमत्ता जागृत होगी - Page 51

32 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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दिनांक 6 अक्तूबर, 1939 को प्राप्त संदेश के अनुसार डॉ. बी. आर. अम्बेडकर को महामहिम वायसराय से मुलाकात करने के लिए सोमवार दिनांक 9 अक्तूबर, 1939 को आमंत्रित किया गया था। ख्1, तदनुसार, महामहिम वायसराय ने डॉ अम्बेडकर से दिनांक 9 अक्तूबर, 1939 को बातचीत की। इसके अलावा उन्होंने श्री विनायक दामोदर सावरकर और सर मोहम्मद याकूब से भी बातचीत की। ख्2,

तत्पश्चात डॉ. अम्बेडकर ने यह बयान जारी किया :

नई दिल्ली, दिनांक 10 अक्तूबर, 1939

“अल्पसंख्यकों की समस्या का समाधान तब तक नहीं हो सकता जब तक श्री गांधी और कांग्रेस, गैर-कांग्रेसी व्यक्तियों और पार्टियों के प्रति अपना स्वार्थी और अक्खड़ दृष्टिकोण त्याग नहीं देते। देशभक्ति कांग्रेसजनों का एकाधिकार नहीं है और कांग्रेस से मतभेद रखने वाले व्यक्तियों को भी अपना अस्तित्व बनाए रखने और मान्यता प्राप्त करने का पूरा विधिसम्मत अधिकार है।” ये उद्गार डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने आज सुबह मुम्बई रवाना होने से पहले एसोसिएटेड प्रेस को दिए गए एक बयान में व्यक्त किए।

डॉ. अम्बेडकर, जो कल दिल्ली आए थे, ने महामहिम वायसराय से लम्बी बातचीत की। समझा जाता है कि उन्होंने भारत में संविधान निर्माण की प्रगति और अपने समुदाय की वैचारिक स्थिति से वायसराय को अवगत कराया। इस संबंध में डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि पूना समझौते का कार्यान्वयन संतोषजनक नहीं कहा जा सकता। बहुसदस्यीय निर्वाचन क्षेत्रों के अभाव में अनुसूचित जातियों के वास्तविक प्रतिनिधि चुनाव जीतकर विधानमंडल में नहीं पहुंच सके हैं। वह इस प्रश्न को आगामी पुनरीक्षा के दौरान उठाना चाहते हैं, जो उन्हें आशा है कि पहले से तय कार्यक्रम से भी पहले ही की जाएगी। जब तक अनुसूचित जातियों के वास्तविक प्रतिनिधित्व का 12 द बॉम्बे क्रॉनिकल, दिनांक 7 अक्तूबर, 1939 द बॉम्बे क्रॉनिकल, दिनांक 10 अक्तूबर, 1939