486 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जिन्होंने बुद्ध के बारे में लिखा है, ने इस विचार का प्रचार किया है कि केवल एक बात जो बुद्ध ने सिखाई है वह है अहिंसा। यह एक बहुत बड़ी भूल है। यह सच है कि बुद्ध ने अहिंसा का पाठ पढ़ाया है। मैं इसकी महत्ता को कम नहीं करना चाहता। इसके लिए एक बहुत बड़ा सिद्धान्त है। विश्व को बचाया नहीं जा सकता जब तक इसका अनुसरण न किया जाए। मैं इस बात पर बल देना चाहता हूँ कि बुद्ध ने अहिंसा के अतिरिक्त कई और शिक्षायें दी हैं। उन्होंने अपने धर्म के रूप में सामाजिक सुधार, बौद्धिक स्वतंत्रता, आर्थिक स्वतंत्रता और राजनैतिक स्वतंत्रता का पाठ पढ़ाया है। उन्होंने समानता का पाठ पढ़ाया है केवल पुरुष एवं पुरुष के मध्य ही समानता नहीं बल्कि पुरुष एवं महिला के मध्य भी समानता की शिक्षा दी है। ऐसा धार्मिक गुरु ढूंढ़ना कठिन है जिसकी तुलना बुद्ध से की जाए, जिसकी शिक्षाओं ने लोगों के सामाजिक जीवन के विभिन्न पहलुओं को अंगीकार किया हो, उसके सिद्धान्त इतने आधुनिक हों और उनका मुख्य संबंध मनुष्य को उसके जीवनकाल में मोक्ष की प्राप्ति कराये और न कि उसकी मृत्यु के पश्चात् स्वर्ग में मोक्ष दिलवाने का वचन दे।
V.
बौद्ध धर्म के प्रचार के इस ध्येय को कैसे चरितार्थ किया जा सकता है? तीन उपाय आवश्यक प्रतीत होते हैं :-
प्रथम : बौद्ध धर्म की बाइबिल तैयार की जाए।
द्वितीय : भिक्खू संघ के संगठन, उद्देश्यों एवं लक्ष्यों में परिवर्तन किया
जाए।
तृतीय : विश्व बौद्ध मिशन स्थापित किया जाए।
बौद्ध धर्म की बाइबिल तैयार करने की पहली एवं सर्वोपरि आवश्यकता है। बौद्ध साहित्य एक विस्तृत साहित्य है। यह आशा करना असंभव है कि एक व्यक्ति जो बौद्ध धर्म के सार को जानना चाहता है वह साहित्य रूपी सागर में गोते लगाये। बौद्ध धर्म की अपेक्षा अन्य धर्मों का सबसे बड़ा लाभ यह है कि प्रत्येक धर्म की अपनी धार्मिक पुस्तक जिन्हें हर कोई अपने साथ ले जा सकता है और जहाँ कहीं जाता है पढ़ सकता है। यह एक सुविधाजनक है। बौद्ध धर्म को हानि इसलिए हो रही कि उसकी कोई ेऐसी धार्मिक पुस्तक नहीं है जिसे सुविधापूर्वक उठाया जा सके। भारतीय धम्मपद वह कार्य करने में असफल रहा है जिसकी धार्मिक पुस्तक से अपेक्षा की जाती है। प्रत्येक बड़ा धर्म विश्वास पर निर्मित होता है। परन्तु विश्वास