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को आत्मसात् नहीं किया जा सकता यदि उसे संक्षिप्त और काल्पनिक सिद्धान्तों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसे कुछ ऐसी चीजों की आवश्यकता होती है जिन पर काल्पनिकता थोपी जा सके जैसे कुछ पौराणिक या महाकाव्य या सिद्धान्त जिन्हें पत्रकारिता की भाषा में कहानी कहा जाता है। धम्मपद को कहानी से बांधा नहीं जा सकता। सारांश रूढि़यों पर विश्वास निर्मित करने की आवश्यकता है।
बौद्ध धर्म की प्रस्तावित सैद्धान्तिक पुस्तक में होना चाहिए - 1. बुद्ध का संक्षिप्त जीवन-चरित; 2. चीन का धम्मपद; 3. बुद्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण संवाद; और 4. बौद्ध के अनुष्ठान, जन्म, दीक्षा, विवाह और मृत्यु। ऐसी पुस्तक को तैयार करने में भाषा की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। इसमें ऐसी भाषा का प्रयोग किया जाये जो इसे जीवन्त रूप प्रदान करे। इसे वर्णनात्मक रूप से पढ़ा जाने वाला कथनात्मक या नैतिक अभिव्यक्ति बनाने की बजाय जादुई मंत्र बनाया जाये। इसकी शैली सुव्यक्त, प्रवाही एवं सम्मोही प्रभाव की होनी चाहिए।
हिन्दू संन्यासी और बौद्ध भिक्खू में विश्वव्यापी अन्तर है। हिन्दू संन्यासी का विश्व से कुछ लेन-देन नहीं है। वह विश्व के लिए निर्जीव है।
भिक्खू को पूरे विश्व से सरोकार है। इससे प्रश्न उत्पन्न होता है कि बुद्ध ने किस उद्देश्य से भिक्खू संघ स्थापित करने की सोची थी। भिक्खुओं के लिए अलग समाज बनाने की क्या आवश्यकता थी? समाज स्थापित करने का एक उद्देश्य यह था कि जो बौद्ध के आदर्शों, जिसमें बौद्ध धर्म के सिद्धान्त हों और सामान्य जन के लिए एक आदर्श रूप में कार्य करें, के अनुरूप जीवन-यापन करें। बुद्ध जानते थे कि सामान्य जन के लिए यह संभव नहीं है कि बौद्ध के आदर्श को समझ सके। परन्तु वह यह भी चाहते थे कि सामान्य जन समझे की आदर्श क्या हैं और समाज उनके आदर्शों का व्यावहारिक रूप से प्रयोग करे। इसकी कारण से उन्होंने भिम्खू संघ का गठन किया और उसे विनय के नियमों से बाँध दिया। परन्तु उनके मस्तिष्क में अन्य उद्देश्य भी थे जब उन्होंने संघ की स्थापना करने की सोची। इसमें से एक उद्देश्य यह था कि बुद्धिजीवी लोगों की एक संस्था बनाई जाए जो सामान्य जन का सही एवं निष्पक्ष मार्गदर्शन दें। इसी कारण से उन्होंने भिक्षुओं को भू-स्वामित्व से रोका था। सम्पत्ति का स्वामित्व स्वतंत्र सोच एवं स्वतंत्र विचारों के प्रयोग में सबसे बड़ी बाधा है।
भिक्खू संघ की स्थापना करने का उद्देश्य ऐसे व्यक्तियों का समाज बनाना था जो लोगों की सेवा करने के लिए स्वतंत्र हो। इसी कारण से वह नहीं चाहते थे कि भिक्खू विवाह करे।