488 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
क्या आज का भिक्खू संघ इन आदर्शों पर जीवित है?
इसका उत्तर स्पष्ट रूप से नकारात्मक है। यह न तो लोगों का मार्गदर्शन करते हैं और न ही उनकी सेवा करते हैं।
अतः अपनी वर्तमान दशा में भिक्खू संघ बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए किसी काम का नहीं है। प्रथमतः यहाँ अत्यधिक भिक्खू हैं। इनमें से अधिकतर केवल साधु एवं संन्यासी हैं जो अपना समय ध्यान-चिंतन या निठल्लेपन में व्यतीत कर रहे हैं। उनमें न तो ज्ञान है और न ही सेवा-भावना। जब पीडि़त मानवता की सेवा का विचार मन में आता है तो हर कोई रामकृष्ण मिशन के बारे में सोचता है। कोई भी बौद्ध संघ के बारे में नहीं सोचता है। मानव सेवा को कौन अपना पावन कर्त्तव्य मानेगा संघ या मिशन? इसके उत्तर के संबंध मे कोई संदेह नहीं हो सकता। अभी भी संघ निठल्लों की एक बहुत बड़ी जमात है। हम कुछ ही भिक्खू चाहते हैं और हम उच्च शिक्षित भिक्खू चाहते है, भिक्खू संघ ईसाई पुरोहिताई विशेषकर रोमन कैथोलिक सम्प्रदाय की कुछ विशेषतायें ग्रहण करें। ईसाई धर्म एशिया में सेवा भावना, शिक्षा एवं चिकित्सा के माध्यम से फैला है। ऐसा इसलिए संभव हो पाया है क्योंकि ईसाई पुरोहित न केवल धार्मिक ज्ञान में ही पारंगत है बल्कि वे कला एवं विज्ञान में भी पारंगत हैं। वास्तव में प्राचीन समय में यह भिक्खुओं के आदर्श थे। जैसा कि हम भली-भाँति जानते हैं कि तक्षशिला एवं नालंदा विश्वविद्यालय भिक्खुओं द्वारा संचालित एवं शासित थे। स्पष्टतया वे बुद्धिजीवी लोग होंगे और जानते होंगे कि अपने मत के प्रचार के लिए समाज सेवा अनिवार्य है। वर्तमान के भिक्खुओं को पुराने आदर्शों को पुनः अंगीकर करना होगा। वर्तमान में जो संघ गठित हैं वे सामान्य जन की सेवा नहीं कर सकते और इस प्रकार वे लोगों को अपनी ओर आकर्षित नहीं कर सकते।
बिना किसी उद्देश्य के बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार नहीं हो सकता। जैसे कि शिक्षा दी जानी अपेक्षित है उसी प्रकार धर्म का प्रचार-प्रसार भी अपेक्षित है। प्रचार बिना व्यक्तियों एवं धन के नहीं किया जा सकता। इनकी आपूर्ति कौन कर सकता है? स्पष्टता वे देश जहाँ बौद्ध धर्म एक जीवन्त धर्म है। ये वे देश हैं जो कम से कम अपनी प्रारंभिक अवस्था के लिए मनुष्य एवं धन की व्यवस्था कर सकते हैं। क्या वे ऐसा करेंगे? इन देशों में बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए इतना अधिक उत्साह नहीं दिखाई देता।
दूसरी ओर बौद्ध धर्म के प्रचार एवं प्रसार के लिए यह बिल्कुल अनुकूल समय है। एक समय था जब धर्म विरासत का एक हिस्सा होता था। एक समय था जब