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कोई तरीका नहीं ढूंढ लिया जाता, उन्हें खेद है कि अपने समुदाय के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्रों पर जोर देना पड़ेगा। हिन्दू-मुस्लिम समस्या
हिन्दू-मुस्लिम समस्या का उल्लेख करते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि वह इस आरोप को सही नहीं मानते कि कांग्रेस शासित प्रांतों में मुसलमानों पर अत्याचार हो रहे हैं अथवा उन्हें आतंकित किया जा रहा है। आज मुसलमान और अन्य अल्पसंख्यक देश की सरकार में हिस्सेदारी और शासक वर्ग में बराबरी का दर्जा चाहते हैं। कांग्रेस हमेशा से उससे वंचित करती रही है और अपने संगठन के अलावा किसी और वर्ग अथवा समुदाय को मान्यता देने से इंकार करती रही है।
उन्होंने कहा कि मुसलमान अब तक सुरक्षा उपाय चाहते रहे हैं, जिसका तात्पर्य है कि जरूरी संरक्षण मिलने पर वह अन्य समुदायों के साथ रहने के लिए तैयार हैं। आज भारत को हिन्दू भारत और मुसलमान भारत में विभाजित करने की मांग उठी है और यदि यही दृष्टिकोण आम जनता में पैठ बना लेता है, तो अखण्ड भारत की कोई आशा नहीं रह जाएगी। आज इसका समाधान कांग्रेस और बहुसंख्यक समाज के पास है और इसके लिए मानसिक आदार्य, राजनीतिमत्ता और वास्तविकता से रूबरू होने की जरूरत है। “बहुत देर हो चुकी होगी”
डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि कल तक बहुत देर हो चुकी होगी। यह समस्या सुलझाई जा सकती है और इसे सुलझाया जाना चाहिए। समस्या अब केवल यह नहीं है कि अल्पसंख्यकों के साथ उचित और बराबर का व्यवहार होना चाहिए। समस्या यह है कि अल्पसंख्यकों को महसूस कराया जाए कि वे ........... देश की सरकार के अभिन्न अंग हैं। अब यह गरिमा और आत्मसम्मान का प्रश्न बन गया है।
अपने वक्तव्य का समापन करते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि आज की स्थिति में अपने समुदाय को किसी और बड़े समुदाय में शामिल होने से रोक पाना उन्हें कठिन प्रतीत हो रहा ह,ै परन्तु कांग्रेस का वर्तमान रवैया उनकी आवाज को शायद अप्रभावी कर देगा। अनुसूचित जातियों के किसी और धर्म में जाकर मिल जाने की जिम्मेदारी कांग्रेस की होगी। “मुझे उम्मीद है कि भारत के दो टुकड़े होने से रोकने और अनुसूचित जातियों को ताकतवर और प्रभावशाली अल्पसंख्यकों से जाकर मिलने से रोकने के लिए कांग्रेस में समय रहते सद्बुद्धि और राजनीतिमत्ता जागृत होगी।” ख्1,
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1 द टाइम्स ऑफ इंडिया, दिनांक 11 अक्तूबर, 1939