106. हिन्दू महिला का उत्थान एवं पतनः इसके लिए जिम्मेवार कौन था? - Page 510

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परन्तु यदि वे हम से बात करे,

तो महात्मन्, हमें क्या करना चाहिए?

हमें पूरी तरह से जागरूक हो जाना चाहिए, आनन्द

इस बात का खण्डन नहीं किया जा सकता कि यह अनुच्छेद ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय प्रैस द्वारा प्रकाशित महापरिनिभाना सुत्त के मूल पाठ में प्रकाशित है। लेकिन मुद्दा यह नहीं है कि अनुच्छेद है या नहीं। मुद्दा यह है कि इस अनुच्छेद पर कोई तर्क किया जाए, क्या यह सिद्ध करना आवश्यक नहीं है कि मूल-पाठ मौलिक और प्रमाणित है और भिक्खुओं द्वारा बाद में सम्मिलित नहीं किया गया है?

जो कोई बुद्ध की मुख्य शिक्षाओं से अवगत है वह सुत्त पिटाका को पढ़ने के पश्चात् किंकर्त्तव्यविमूढ़ हो जाएगा क्यों कि अब हम देखते हैं कि उन्हें पौराणिक आवरण से ढक दिया है, बौद्ध की मूल शिक्षा में ब्राह्मण विचारों का समावेश कर विकृत एवं मठीय आदर्शों को लागू करने की इच्छा से मठीय विचारों से विरूपित कर दिया गया है। इसलिए वास्तविकता की जानकारी रखने वाला व्यक्ति श्रीमती रायस डेविड के आश्चर्य के साथ जुड़ना चाहेगा और पूछेगाः

‘इन पृष्ठों’ (सुत्त पिटाका) में गौतम कहाँ है? इसमें से कम से कम कितना मौलिक शिक्षा में जोड़ा गया है, स्पष्ट या सन्दिग्धतापूर्ण प्रस्तुत किया गया है उत्तरवर्ती वाचकों ने समय के साथ इसमें क्या जोड़ा है, अध्यापकों द्वारा अपनी स्मरण शक्ति के आधार, जनसाधारण के अध्यापकों द्वारा नहीं बल्कि मौखिक रूप से विद्या-अर्जन करने वाले प्रायः अनाड़ी शिष्यों, सम्पादकों जिन्होंने काफी समय पूर्व धारा प्रवाह रूप में सुनकर लिखित रूप देने का प्रयास किया है? और ये सभी व्यक्ति वाचक, अध्यापक, सम्पादक हैं जिनके जीवन के आदर्शों का विकल्प विश्व के शेष व्यक्तियों से भिन्न होता है, इनके आदर्श आनुपातिक आधार पर भिन्न होते हैं। इस विकृत माध्यम के द्वारा उसे पढ़ना पड़ा और अपने आप से पूछा कि कौन-सी उक्ति, किस मान्य सच्चे अध्यापक एवं मार्गदर्शक के जहन में डाली जाए, किसी ऐसे व्यक्ति की ओर से की जाने वाली संभावना है, किसके पास इसका दस्तावेजी प्रमाण हो सकता है?

अतः इस सुझाव में कुछ भी असंगत नहीं हो सकता कि अनुच्छेद भिक्खुओं द्वारा बाद में सम्मिलित किया गया है। प्रथम कि बुद्ध की मृत्यु के पश्चात् 400 वर्षों तक सुत्त पिटाका को लिखित रूप नहीं दिया गया। दूसरा सम्पादकों, जिन्होंने इनको संकलित और सम्पादित किया भिक्षु थे और भिक्षु सम्पादकों ने भिक्षुओं के लिए संकलन किया और लिखा। बुद्ध के प्रति व्यक्ति कृतज्ञता भिक्षुओं के लिए