494 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
उल्लेख के अनुसार वह वास्तविक सच है। क्या उसने बुद्ध द्वारा कुछ मिनट
पूर्व दिये गये परामर्श की खुले आम एवं जानबूझकर अवज्ञा की थी? इसका
उत्तर नकारात्मक ही होगा। इस नकारात्मक उत्तर से क्या परिणाम निकलना
चाहिए। इससे यही परिणाम निकलता है कि बुद्ध ने ऐसा परामर्श कभी नहीं
दिया होगा जैसाकि उसके विरोध में कहा गया है। यदि बुद्ध ने ऐसा परामर्श
दिया होता तो आनन्द इसके विपरीत कार्य नहीं कर सकता था। अतः यह
युक्तियुक्त है कि बुद्ध द्वारा ऐसा परामर्श कभी नहीं दिया गया।
अब हम बुद्ध की ओर से इस प्रश्न पर विचार करते हैं। क्या ये बुद्ध के लिए
सहज है कि उन्होंने ऐसा उत्तर दिया होगा। इस प्रश्न का उत्तर बुद्ध का
महिलाओं के प्रति किये गये आचरण पर निर्भर करता है। क्या बुद्ध महिलाओं
से मिलने से बचते थे जैसा कि आनन्द को दिये गये परामर्श में बताया गया
है? वास्तविकतायें क्या हैं?
अचानक दो उदाहरण मेरे मस्तिष्क में आये इनमें से एक विशाखा का है। वह बुद्ध के अस्सी मुख्य अनुयायियों में से एक थी और ‘‘भिक्षा देने वालों के मुखिया’’ की उपाधि से सुशोभित थी। क्या एक बार विशाखा बुद्ध का उपदेश सुनने के लिए नहीं गई थी? क्या उसने उनके मठ में प्रवेश नहीं किया था? क्या बुद्ध ने विशाखा के प्रति जो व्यवहार किया था उसी के अनुरूप महिलाओं के प्रति व्यवहार करने के लिए आनन्द को निर्देशित नहीं किया था? बैठक में उपस्थित भिक्षुओं ने क्या किया था? क्या वे बैठक से चले गये थे?
दूसरा उदाहरण जो मेरे मस्तिष्क में आ रहा है वह वैशाली की आम्रपाली का है। वह बुद्ध से मिलने गई और उनको व उनके भिक्षुओं को अपने घर भोजन पर आमन्त्रित किया। वह वेश्या थी। वह वैशाली की सबसे खूबसूरत महिला थी। क्या बुद्ध और भिक्षु इससे दूर रहे? दूसरी ओर उन्होंने लिच्छिवियों का आमंत्रण अस्वीकार कर उसका आमंत्रण स्वीकार किया और आम्रपाली के घर जाकर भोजन में भाग लिया जिससे लिच्छिवियों ने अपने आप को अपमानित समझा।
अन्य उदाहरणों की आवश्यकता नहीं है नन्दाकोवादा सुत्त में बताया गया है कि महाप्रजापति गौतमी द्वारा बुद्ध के पास पाँच सौ भिक्षुक महिलाओं को अपने साथ इस अनुरोध के साथ लाया गया जब वह श्रावस्ती में रह रहे थे, कि वे उन्हें सिद्धान्त एवं अनुशासन की दीक्षा देंगे। क्या बुद्ध उनसे भाग गये थे।
संयुक्त निकाय बताता है कि पाजुन्ना की पुत्री कण्णा जब रात देर का समग्र