106. हिन्दू महिला का उत्थान एवं पतनः इसके लिए जिम्मेवार कौन था? - Page 520

501

व्यक्ति स्वतन्त्रता के अधिकारों और विशेषकर समाज की बेडि़यों (रूढि़यों) से ऊपर उठने के अधिकार के प्रबल समर्थक के रूप में मान्यता देनी चाहिए।

अन्यथा जब कभी आध्यात्मिक स्वतन्त्रता के लिए इच्छा जाग्रत होती तो जंगल में जाकर आध्यात्मिक रूप से स्वतन्त्रता का जीवन जीना होता है।’’

बुद्ध द्वारा भारतीय महिलाओं को दी गई यह स्वतन्त्रता वास्तव में बहुत बड़े महत्त्व की बात है और भिक्खुनियों के भिक्खु संघ की अधीनता में होने से जो कलंक लगे थे वे सब मिट गये हैं। यह कोई निरर्थक स्वतन्त्रता नहीं थी। यह स्वतन्त्रता भी जिससे वे स्पष्ट एवं व्यक्त रूप से आनन्दित हो रही थी और गा रही थी .............. वास्तव में स्वतन्त्र होकर कितनी सम्मानित रूप से आज़ाद हूँ मैं मुक्ता ............ एक भिक्खुनी जो ब्राहा्रण लड़की थी, गा रही थी। दूसरी भिक्खुनी भी ब्राहा्रण लड़की थी, और गा रही थी कि मैं एक पहाड़ पर बैठकर अपने आध्यात्म से आज़ादी की साँस ले रही है।

जैसा कि श्रीमती रायस् डेविड ने कहा है-

‘‘अपनी स्वतन्त्रता प्राप्त करने के कार्य में गतिशीलता लाने के लिए उन्होंने पूर्ववर्ती अपनी ईसाई बहनों की तरह सामाजिक घरेलू सफलता के मापदण्ड निर्दिष्ट किये हैं, वे अपना संसार भूल गई है परन्तु इसके बदले में उन्हें आश्रित होने की बजाय अपने निजी अस्तित्व का दर्जा प्राप्त किया है जो कि प्रशंसनीय, पोषित एवं परिरक्षित है। कपड़ों से लिपटा मुँडा सिर, एक समान कपड़े पुरुष संन्यासियों के समान सुफेद चोगे और सफेद अंग वस्त्रों से ऐसा प्रतीत होता है कि बहने कही आने-जाने के लिए स्वतन्त्र थीं और वनों में विचरण एवं पहाड़ों पर चढ़ते हुए सुख की साँसें ले रही थी।’’

महिलाओं को भिक्खुनियाँ बनने की स्वीकृति देकर बुद्ध ने उनके लिए न केवल स्वतंत्रता का मार्ग खोला परन्तु उन्होंने बिना किसी लिंग के भेदभाव के प्रतिष्ठा भी प्राप्त करने की स्वीकृति प्रदान की। श्री राचस डेनिस के शब्दों में उनके द्वारा प्राप्त की जा सकने वाली स्वतंत्रता है?

अन्य संन्यासी तपस्वी के साथ परिणय की खुशी को कम से कम उसके भाई अराहन्त द्वारा विवेकी पुरुष होने के नाते बिना लिंगभेद के मान्यता प्रदान की गई। इस प्रकार उसने आध्यात्मिकता की वास्तविकता को समझा, उसने पिट्टक में आर्यस् के नाम से धार्मिक व्यवस्था की बौद्धिक सहचारिता परस्पर आदान-प्रदान उनके साथ