109. दी महारोंः वे कौन थे तथा वे कैसे अस्पृश्य बने? - Page 540

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संकेत है। इसे मस्तिष्क में रखते हुए महारों और मराठों में ‘कुल’ की तुलना से बहुत ही महत्त्वपूर्ण परिणाम निकलते हैं।

(निम्न उल्लिखित तालिका पाण्डुलिपि में उपलब्ध नहीं है-सम्पादक)

तालिका पर नज़र डालने से ज्ञात होगा कि महारों में ऐसा कोई कुल नहीं जो मराठों में नहीं है और मराठों में ऐसा कोई ‘कुल’ नहीं है जो महारों में नहीं है। यदि नृवंश विज्ञान के इस अभिकथन के समर्थन पर आश्रित रहा जा सकता है कि साझा ‘कुल’ रिश्तेदारी का सूचक है तब महार एवं मराठा मं खून के रिश्ते होने संबंधी सम्प्रदाय है और महारों को मूल निवासी सम्प्रदाय के रूप में रद्द नहीं किया जा सकता जब तक कि कोई यह कहने को तैयार न हो कि मराठा भी एक मूल निवासी सम्प्रदाय है।

मराठा, आर्य या गैर-आर्य समुदाय है, यह एक ऐसा प्रश्न है जिस पर कोई सर्वसम्मति नहीं हुई है। राइसले का मत है कि मराठा आर्य नहीं थे, और उन्होंने अपना निष्कर्ष नृवंश विज्ञान के सिद्धान्तों पर दिया है। अन्यों ने इस दृष्टिकोण को चुनौती दी है और निष्कर्ष निकाला है कि मराठा आर्य है और राइसैल की नृवंश विज्ञान संबंधी आपत्तियों का उत्तर इस तर्क के साथ दिया है कि आर्य आक्रमणकर्त्ताओं की दो धारायें थी और मराठा दूसरे से संबंधित हैं। यही कारण है कि उनका नृवंश विज्ञान संबंधी वक्तव्य राइसले द्वारा माने गये मानकों के अनुरूप नहीं है। दूसरी परिकल्पना से कुछ समर्थन इस तथ्य से मिलता है कि प्राचीन काल में महाराष्ट्र अराइके के नाम से इस आधार पर जाना जाता था कि आर्यों ने ‘अरेर मेटिड’ (आर्यन् व्यक्ति) कहा जाता है।

जैसा भी हो यहाँ ऐसा कोई प्रश्न नहीं है कि महार मूल नागरिक नहीं हैं। इस अभिव्यति के समर्थन में कुछ भी कहा गया हो, के अतिरिक्त अन्य प्रवर्त्तक घटनायें एवं स्मृतिचिन्ह हैं जिन पर इस दृष्टिकोण के लिए निर्भर रहा जा सकता है। पहली चीज़ वह है जिस पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि ‘कुल’ की अत्यधिक संख्या इस बात की सूचक है कि महारों में भी राजपूत का दर्जा पाया जाता है। ब्राह्मणों एवं मराठों में भी इस बात पर शास्त्रार्थ हुआ था कि मराठा क्षत्रिय हैं। या नहीं, इस शास्त्रार्थ में इस बात पर चर्चा की गई कि क्या मराठों का कुल 96 कुलों में से एक है, ये सभी 96 कुल राजपूतों के होने स्वीकार किये गये थे और इस हैसियत पर होने पर क्षत्रिय संबंधी कोई प्रश्न नहीं उठता। अब यह परीक्षण महारां पर किया गया, तो इस संबंध में यहाँ ऐसा कोई प्रश्न हो सकता जिससे कि महारों को मूलरूप से राजपूत होना कहा गया हो जैसा कि क्षत्रिय जाति के लिए कहा गया है। यह