524 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
से यह दर्शाते हैं कि मराठा मूल निवासी नहीं थे और वे कभी जाति से मराठा और हैसियत से क्षत्रिय नहीं थे।
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वे गाँव से बाहर क्यों रहते थे?
ऐसा स्वीकार किया जाता है महार गाँव से बाहर रहते हैं। यह एक वास्तविकता है कि इसे किसी भी कीमत पर विदेशी नहीं माना जा सकता क्योंकि गाँव सामान्यतया
खुले स्थल पर बिना किसी सीमाओं को निश्चित किये बनाया जाता है। परन्तु दो चीजं़े निर्विवाद रूप से यह प्रदर्शित करती हैं कि महारों को गाँव से बाहर रहने वाला माना जाता है। प्रत्येक ग्रामवासी इस प्रकार गाँव के मध्य भिन्नता करता है और महारवाड़ा का इस प्रकार अर्थ महार-वाड़ा है इसका अर्थ है कि महारों की बस्ती जो गाँव के बीचों-बीच नहीं है। अधिक स्पष्ट रूप से यह कहा जा सकता है कि जहाँ गाँव की सीमा है। जब कभी गाँव का ‘गवखुश’ के रूप में कोई स्थानीय कार्यक्रम होता है तो यह देखा जा सकता है कि महारों की बस्ती हमेशा गाँव के बाहर होती है। अब इस तथ्य को लेख में दिये गये पहले प्रश्न के संबंध में वर्णित को दृष्टिगत रखते हुए जो कुछ पढ़ा गया है उससे दूसरे प्रश्न को पर्याप्त महत्त्व मिलता है। यदि महार मूल निवासी नहीं हैं तो उन्हें समाज के परित्यक्त वर्ग के रूप में क्यों माना जाता है। अत्यधिक स्वाभाविक उत्तर जो हर किसी को सही उत्तर के रूप में प्रभावित करती है वह है मनु संहिता में वर्णित निषेधाज्ञायें। चण्डाल के संबंध में बातचीत की जाए तो मनु ने उन्हें गांव की सीमा से बाहर रहने के लिए बाध्य किया है। चण्डालों के बारे में मनु द्वारा कही गई बातों से सामान्य धारणा से यह अन्दाजा लगाया जा सकता है कि उसने जो कुछ चण्डालों के बारे में कहा है उसको हिन्दू शासकों ने इसी प्रकार के सभी वर्गों पर पूर्णरूपेण सख्ती से लागू कर दिया। गंभीरता से विचार करने पर मुझे लगता है कि उठाये गये प्रश्न का उत्तर नहीं हो सकता। जो कुछ भी मनु ने कहा है वह कानून-निर्माताओं के भी मौलिक आदेश नहीं है। मेरी समझ के अनुसार मनु ने ऐतिहासिक काल में कार्यशील ताकतों के परिणामस्वरूप जो कुछ हो रहा था उसको अपना वास्तविक आदर्श बना दिया क्योंकि इससे उसका मकसद हल हो रहा था। इस प्रश्न के उत्तर को भिन्न दृष्टिकोणों से देखा जाना चाहिए। मेरे विचार से इसका सही उत्तर उस काल का अध्ययन करने से प्राप्त किया जा सकता है जिसमें समुदाय प्रशपालन से व्यवस्थित समुदाय के रूप में परिवर्तित हो गया। यह सभ्यता के विकास के विद्यार्थियों के लिए सामान्य ज्ञान का मामला है कि समुदाय की सम्पदा की प्रकृति ही आदतों को नियत करने का मुख्य निर्धारक कारक होता है। पशुपालक कभी भी एक स्थान पर नहीं बसते हैं परन्तु एक स्थान