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इससे बहुत बड़ा अन्तर आ गया। गाँववासियों ने गाय-माँस खाना बन्द कर दिया क्योंकि वे वध की हुई गाय का माँस खाते थे और चूँकि गाय का वध होना बन्द हो गया था इसलिए उन्होंने गाय का माँस खाना बन्द कर दिया। खंडित कबीलों के लोगों ने जो सीमा पर रहते थ, मृत गाय का मांस खाना जारी रखा। उन्हें रोकना आवश्यक नहीं था क्योंकि वह मृत गाय का माँस खाते थे। जो बिल्कुल गाय का माँस नहीं खाते थे और जो खाते थे, उनका विभाजन केवल आर्थिक अन्तर से नहीं हुआ था। यह एक ऐसा अन्तर था जिसने धार्मिक विचारों को जन्म दिया। धर्म की दृष्टि से गाय का वध एक दुराचारी धारणा बन गई। और जो वर्ग मृत गायों से संबंधित कार्य करते थे, वे भी दुराग्राही वर्ग बन गया। दुराग्रह की इस धारणा से अस्पृश्यता का उद्भव हुआ। दुराग्रह की धारणा गाय के सम्मान या तिरस्कार पर आधारित है। ब्राह्मण अपने स्वयं के हित को ध्यान में रखते हुए गाय का सम्मान व पूजा करने के लिए सहमत हो गये। ये इतना आगे बढ़ गये कि कोई भी वर्ग गाय की पूजा से संबद्ध कार्य करता तो वह आलोचना का पात्र होता, इसलिए अस्पृश्य सहचार के योग्य नहीं है।
यह अस्पृश्यता का उद्भव है और कि इसका यही कारण है कि महार अस्पृश्य क्यों माने जाने लगे, का पता लगाया जा सकता था आदि किसी ने इस संबंध में मामले को प्रमाणित करने का प्रयास किया होता और भारत में इन समुदायों के क्या विशेष कार्य है तथा कौन ऐसा दुर्भागी व्यक्ति है जिन्हें अस्पृश्य समुदाय माना जाता है। इस मामले की जाँच करने से हमें पता चलता है कि पूरे भारत में अस्पृश्य कुछ ऐसे कार्य करते हैं जो उन सबके समान हैं। इन कार्यों में मृत गायों को ले जाना, मृत गाय की चमड़ी अलग करना, माँस खाना, हड्डियों को बेचना आदि सम्मिलित है। इस अभिव्यक्ति में कोई अपवाद नहीं है। यह सभी मामलों एवं सभी प्रान्तों में लागू होता है। मृत गाय और अस्पृश्यता में इतना गहरा संबंध क्यों है कि यह दोनों एक साथ क्यों चलते हैं? मेरा उत्तर यह है कि यह एक-दूसरे का कारण है। हिन्दू समुदाय का उनके प्रति दुराग्रह जिन्होंने गाय का माँस खाना बन्द नहीं किया चूँकि बौद्ध धर्म ने गाय की पूजा करनी प्रारम्भ कर दी थी। महारों ने मृत गाय को खाना बन्द नहीं किया और परिणामस्वरूप इस दुराग्रह का कारण एवं शिकार बन गये।
इस लेख में उठाये गये तीनों प्रश्नों का अब उत्तर दिया जा चुका है। लेकिन एक और प्रश्न रह गया है वह यह है कि महारों को महार क्यों कहा जाता है।
कई लोगों ने परिभाषा देने का प्रयास किया परन्तु इन सबमें डॉक्टर भण्डारकर द्वारा दी गई सही प्रतीत होती है। डॉ. भण्डारकर के अनुसार महार शब्द मृत-आहार