531
परवारी शब्द का क्या अर्थ है। वास्तव में उत्तर देने के लिए यह कठिन प्रश्न है। सभी यही जानते हैं कि इसका अर्थ निर्भरता है जो कि परिवार शब्द का मूल अर्थ है और परवारी इसका बिगड़ा रूप प्रतीत होता है। निस्संदेह खण्डित कबीले अपनी अजीविका के लिए ग्रामीण समुदाय पर निर्भर थे और ग्रामीण समुदाय संभवतः उन्हें व्याख्यात्मक शब्द परवारी नाम से पुकारते हों क्योंकि खण्डित कबीले के लोग उनके लिए अजनबी थे और उनपर निर्भर थे। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि शब्द परवारी प्रचलित था परन्तु अब महार नाम के ज्ञात लोगां तक सीमित न रहा हो। इसका प्रयोग सामान्य रूप से किया जाता था। चूँकि यह सिद्ध करने के लिए दस्तावेजी प्रमाण है कि इसने हर संभव प्रयासों से माँग समुदाय को भी इसमें शामिल किया है। अतः परवारी शब्द उन सभी व्यक्तियों के लिए प्रयोग किया गया प्रतीत होता है जो आये और ग्रामीण समुदायों के लिए अजनबियों की तरह स्थापित हो गये। केवल परवारी शब्द ही संयुक्त शब्द नहीं है बल्कि महार भी संयुक्त शब्द है परन्तु एक ही मूल के होने का संकेत नहीं देता। महार समुदाय संयुक्त समुदाय का प्रतीत होता है, इसमें उच्च सामाजिक स्तर एवं निम्न सामाजिक स्तर के लोग सम्मिलित हैं। इसका संकेत महारों के विभिन्न कुलों से मिलता है। जो ‘कुल’ 96 कुलों में से हैं वे उच्च सामाजिक स्तर के लोग हैं जो इन कुलों में नहीं आते, निम्न सामाजिक स्तर के हैं। परन्तु महार के रूप में एक नाम सैकड़ों वर्षों से प्रचलित हो जाने से लोगों के मन में उच्च या निम्न सामाजिक स्तर की धरणा समाप्त हो गई है। परन्तु नृवंश विज्ञान के विद्यार्थियों की जानकारी के लिए यह जरूरी है कि महार जाति का उद्भव विभन्न खण्डित कबीलों के लोगों से हुआ जिसमें कुछ भी साझा नहीं है। सिवाय इसके कि ये परवारी हैं और ग्रामीण समुदाय पर निर्भर हैं।