110. रिपब्लिकन पार्टी का अर्थ - Page 551

532 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

ifC y d
Col1 dk
Lo r U=r
l e kurk
U; k;
(22)
रिपब्लिकन पार्टी का अर्थ

डॉ० बी.आर. अम्बेडकर के धर्म परिवर्तन के संबंध में निर्णय के अनुसार उन्होंने मई, 1956 में उद्घोषित किया था कि वह अक्टूबर, 1956 में बौद्ध धर्म अपना लेंगे। इसके साथ ही वह भारत के संविधान में निहित सिद्धान्तों पर आधारित एक नया राजनीतिक दल गठित करने के लिए गंभीरता से सोच रहे हैं।

वर्ष 1936 में इंडीपेंडेंट लेबर पार्टी और वर्ष 1942 में अनुसूचित जाति संघ का गठन तथा रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इण्डिया की स्थापना का निर्णय एक आदर्श राजनीतिक दल के माध्यम से अपने सपनों को साकार करने के कर्मठ प्रयासों को स्पष्ट करता है।

अपनी दूरदर्शिता को आकार देने के लिए डॉ० बी.आर. अम्बेडकर ने रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इण्डिया की रूपरेखा निर्णायक रूप से तैयार की। श्री डी.टी. रूपवते द्वारा रूपरेखा का मराठी अनुवाद बाद में प्रबुद्ध भारत रिपब्लिकन पार्टी स्थापना अंक-1957 में परमपूज्य डॉ. बाबा साहब अम्बेडकर का ‘रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इण्डिया’ के गठन के संबंध में भारतीयों को खुला-पत्र शीर्षक से प्रकाशित हुआ।

रूपरेखा के निम्न पाँच अध्याय हैं :

अध्याय-1 एक आन्दोलन कैसे राजनीतिक दल बन गया?

अध्याय-2 प्रजातन्त्र की सफलतापूर्वक कार्यशीलता के लिए दृष्टान्त स्थितियाँ। अध्याय-3 संसदीय सरकार को विपक्षी पार्टी की आवश्यकता क्यों होती है? अध्याय-4 एक पार्टी क्या है?

अध्याय-5 पार्टी के उद्देश्य एवं लक्ष्य

तदनुसार ‘दि रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इण्डिया’ के गठन के संबंध में समाचार जनता के 10 दिसम्बर, 1955 के अंक में प्रकाशित हुआ।