40 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
हस्तांतरण से पहले किसी ऐसी व्यवस्था पर सहमति बनानी होगी जिसके द्वारा सत्ता का सीधा बंटवारा हो, जो नियंत्रण एवं संतुलन का ही दूसरा नाम है। अतः ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत के लोगों को यह बताया जाना बिल्कुल उचित है कि राजनैतिक सत्ता हस्तांतरण की मांग करने से पहले वे अपने संवैधानिक मतभेदों का सहमत समाधान प्रस्तुत करें।
यह कहना हास्यास्पद है कि कांग्रेस देश के लिए लड़ रही है। कांग्रेस इसलिए लड़ रही है कि वह सत्ता की चाबी अपने हाथ में चाहती है। यह कहना भी उतना ही हास्यास्पद है कि कांग्रेस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए लड़ रही है। डिफेंस ऑफ इण्डिया एक्ट को अस्तित्व में आए पूरा एक वर्ष बीत गया है। कांग्रेस ने जो परिश्रम किया है वह सिविल लिबर्टीज यूनियन की हाल की रिपोर्ट में दिया गया है। यदि गाधी जी महसूस करते हैं कि डिफेंस ऑफ इण्डिया एक्ट ने देश को उसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से वंचित कर दिया है तो उन्होंने यह अधिनियम पारित होने पर तुरंत सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू क्यों नहीं किया? उन्होंने एक वर्ष इंतजार क्यों किया? विद्रोह इसके बाद ही क्यों शुरू हुआ जब वायसराय ने बयान दिया कि सरकार देश के अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधियों और अन्य पार्टियों की सहायता से चलने दी जाए? इसका कोई उत्तर नहीं है। डिफेंस ऑफ इण्डिया एक्ट से उत्पन्न कठिनाई वायसराय की योजना को नाकाम करने और अल्पसंख्यकों एवं अन्य लोगों को राजनैतिक ताकत हासिल करने से रोकने के लिए कांग्रेस द्वारा पेश किया गया एक बहाना मात्र है।
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ऐसी बेसिर की कांग्रेस की कारवाई। यह एक अच्छी चालबाजी है और यदि कांग्रेस इसमें कामयाब रहती है तो यह इस बात का एक और प्रमाण होगा कि लोकतांत्रिक सरकार की स्थापना करने वाले ब्रिटिश एक लोकप्रिय पार्टी की नजरों में बुरा बनने का जोखिम नहीं उठाएंगे। लेकिन क्या यह राजनीतिमत्ता है? इस संदर्भ में हमें मि. एस्किथ द्वारा 1923 में की गई कार्रवाई याद आती है। 1923 में हुए चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत हासिल नहीं हुआ था। कंजर्वेटिव पार्टी को 255, लेबर पार्टी को 191 और लिबरल पार्टी को 158 सीटें हासिल हुई थीं। उदारवादियों के नेता के रूप में मि. एस्किथ के सामने तीन विकल्प थे : (i) कंजर्वेटिव पार्टी का समर्थन करना, अथवा ( ii ) लेबर पार्टी का समर्थन करना, अथवा ( iii ) कंजर्वेटिव पार्टी के समर्थन के भरोसे स्वयं पद ग्रहण करना। मि. एस्किथ से टोरी पार्टी से समझौता करने की अपील की गई थी ताकि लेबर पार्टी को सत्ता में आने से रोका जा सके।