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लेकिन ऐसे सुझाव के लालच में आने के बजाए मि. एस्किथ ऐसी किसी योजना के विरुद्ध थे। उन्होंने जो कारण दिए थे उनमें से पहला तो यह था कि ऐसा करना राष्ट्रीय हित के लिए नुकसानदेह होगा और दो मध्यमवर्गीय पार्टियों द्वारा मिलाकर लेबर- पार्टी को सरकार बनाने के अवसर से वंचित रखना वर्ग संघर्ष को बढ़ावा देने वाली बात होगी। यदि कांग्रेसजन अल्पसंख्यकों को अवसर से वंचित रखते है तो मुझे उम्मीद है कि उन्हें महसूस होगा वे अपनी जीत भारी कीमत देकर खरीद रहे हैं। यदि वे इसे अभी महसूस नहीं करते तो तब महसूस करेंगे जब पार्टियां संविधान में संशोधन हेतु बैठक करेंगी। कांगेस की इस कार्यवाही से दो बातें अच्छी तरह स्पष्ट हो जाती हैं। एक तो यह कि ब्रिटिश संसदीय पद्धति इस देश के लिए उपयुक्त नहीं है। दूसरे, यदि कोई एक सद्भावनापूर्ण वायदे के भरोसे एक महत्वपूर्ण रक्षोपाय त्याग देता है तो ऐसा वह अपने स्वयं के जाखिम पर करेगा।
डॉ. बी. आर.
अम्बेडकर” ख्1,
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1 द टाइम्स ऑफ इंडिया दिनांक 24 सितम्बर, 1943