44 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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जैसा कि मैंने कहा, मैं पाकिस्तान को समझ सकता हूँ। लेकिन मैं यह मुस्लिम समुदाय के लिए 50 प्रतिशत के प्रतिनिधित्व की माँग नहीं समझ सकता। न मैं यह समझ सकता हूँ कि यह 50 प्रतिशत की तात्कालिक माँग पाकिस्तान जैसी अंतिम माँग से कैसे जुड़ी हुई है। मुझे पूरा यकीन है कि मुस्लिम लीग की यह माँग शैतानी करतूत है और इसमें कोई संदेह नहीं कि लॉर्ड लिनलिथगो ने यह माँग ठुकरा कर भारत का बहुत भला किया। मेरा यह सुविचारित मत है कि अंतरिम उपाय के तौर पर भारत में ऐसी कोई राष्ट्रीय सरकार नहीं बननी चाहिए जिसमें जिन्ना साहब के 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व के दावे को माने जाने का अभिप्राय हो। आखिरकार, मैं यह नहीं समझता कि युद्ध के प्रयास के मामले में जो कुछ किया जा रहा है, राष्ट्रीय सरकार उससे बढ़कर कुछ और कर सकती है।
भारत ज्यादा कुछ कर नहीं सकता। उसकी क्षमता का अभी विकास नहीं किया गया है। इसका पूरा दोष ब्रिटिश सरकार का है। शांति के समय उसने भारत के संसाधनों का विकास नहीं किया। इसलिए, अभी जो किया जा रहा है उससे अधिक कुछ कर पाना सरकार या राष्ट्रीय सरकार के लिए संभव नहीं है। यदि भारत का पूर्ण विकास किया गया होता तो उसने ब्रिटिश साम्राज्य को बचा लिया होता। अब तो वह स्वयं की भी रक्षा नहीं कर सकता। उसे अपनी रक्षा करनी चाहिए। वह तो आसन्न जापानी आक्रमण से अपनी रक्षा के लिए इंग्लैण्ड का मुंह ताकने को विवश है; ऐसी असहाय स्थिति है उसकी!
रक्षा सदस्य के रूप में किसी भारतीय की नियुक्ति करना एक अच्छा विचार है, परन्तु क्या यह पर्याप्त है? यह समझ पाना बहुत कठिन है कि अपने नियंत्रण में रक्षा साधनों के बिना भारतीय रक्षा मंत्री कर भी क्या सकता है। मेरा विचार है कि रक्षा से जुडे़ साधनों को, जिन्हें इंग्लैण्ड ने अपनी स्वयं की सुरक्षा के लिए जमा कर रखा है, उसे भारत भेजने के लिए कहना भारतीयों के लिए उचित निर्णय होगा। इसी में भारत का तात्कालिक हित है और यही इंग्लैण्ड का कर्त्तव्य है।” ए.पी. ख्1,
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1 द टाइम्स ऑफ इंडिया : 27 फरवरी, 1942