46 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
दौर में अपने आपको फंसाए रखना और अंतिम लक्ष्य को प्राप्त करने में भारत की राजनैतिक प्रगति में रुकावट डालना नहीं चाहते हैं। यदि बात का कोई प्रमाण देना जरूरी है तो वह हैं क्रिप्स मिशन के प्रस्ताव। उन्होंने स्वतंत्रता और संविधान सभा का गठन करना स्वीकार कर लिया है, और यही दोनों माँगें कांग्रेस कर रही थी।
क्रिप्स मिशन के प्रस्तावों के बाद गांधीजी के इस कथन पर विश्वास करना कठिन है कि ब्रिटिश भारत के लोगों के हाथों सŸा सौंपना नहीं चाहते। यह एक सकारात्मक और सुविचारित झूठ है।
क्रिप्स प्रस्तावों को खारिज किया जाना मेरे विचार से इस बात को प्रभावित नहीं करता कि यदि भारतीय अपने लिए औपनिवेशिक दर्जा पसन्द करते हों तो ब्रिटिश सरकार स्वतंत्रता के प्रति वचनबद्ध है।
| Col1 | Col2 |
|---|---|
अदूरदर्शी निर्णय
“यह कोई नहीं जानता कि कांग्रेस ने क्रिप्स मिशन के प्रस्तावों को अस्वीकार करने का निर्णय क्यों लिया, जबकि उनमें स्वतंत्रता और संविधान सभा के गठन की बात मान ली गई थी। यदि रक्षा विभाग का हस्तांतरण नहीं किया जाना ही जनांदोलन छेड़ने का कारण है तो मुझे पक्का विश्वास है कि कोई भी इस अदूरदर्शी निर्णय को सुविचारित नहीं कहेगा। सबसे पहले कांग्रेस ने ब्रिटिश सरकार से युद्ध के उद्देश्यों की केवल घोषणा करने की माँग की थी और युद्ध के दौरान उद्देश्यों पर अमल करने का दावा नहीं किया था। दूसरे, मेरी जानकारी में ऐसा कोई भारतीय राजनेता नहीं है, जो रक्षा विभाग के तकनीकी व सामरिक पक्ष को संभाल पाने में सक्षम हो। भारतीय इस विषय के अध्ययन की उपेक्षा करते आए हैं। तो इन परिस्थितियों में रक्षा विभाग पर नियंत्रण की मांग करना मूर्खतापूर्ण होगा क्योंकि नासमझ व्यक्ति के हाथों में ऐसा नियंत्रण नाममात्र का होगा। तीसरे, जब क्रिप्स मिशन के प्रस्तावों के अनुसार सभी विभागों का हस्तांतरण किया गया तो रक्षा विभाग को हस्तांतरित न करने पर झगड़ा करना बचकाना व्यवहार था। सामान्य बुद्धि रखने वाला कोई भी व्यक्ति यह समझता है कि हस्तांतरित विभागों के मामलों, यदि वे जरूरी और समीचीन हों, को आरक्षित विभागों के दायरे से बाँटा नहीं रखा जा सकता था। गवर्नरों के विशेष अधिकारों के बारे में भी यही हुआ था जब कांग्रेस 1937 में सŸारूढ़ हुई थी। यह कितने आश्चर्य की बात है कि इस मामले में कांग्रेस अपना पिछला अनुभव भूल गई है।
“मेरा यह स्पष्ट अभिमत है कि इस मामले में गड़बड़ी फैलाने के लिए कांग्रेस सहानुभूति की हकदार है। देश की सेवा करने का उसे दिया गया सर्वोत्तम अवसर उसने ठुकरा दिया है। इस दृष्टिकोण से देखते हुए मुझे नहीं जान पड़ता कि गांधीजी