50 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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भारतीय राजनैतिक गतिरोध को कैसे समाप्त किया जाए
भारत सरकार के लेबर मेम्बर माननीय डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने बुधवार को बम्बई में द टाइम्स ऑफ इण्डिया के प्रतिनिधि से हुई बातचीत में भारत के राजनैतिक गतिरोध को समाप्त करने के लिए एक ऐसी योजना की रूपरेखा प्रस्तुत की जो पाकिस्तान के मुद्दे से उत्पन्न विकट समस्या का समाधान करेगी और युद्ध के दौरान राष्ट्रीय सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त करेगी। *
उन्होंने कहा कि “पाकिस्तान का मुद्दा एक प्रारम्भिक मुद्दा समझा जाना चाहिए। जब तक इस मुद्दे का कोई न कोई हल नहीं निकाला जाता तब तक संविधान के निर्माण की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा सकता। इस प्रश्न पर मतभेद दूर करने के लिए हम अब तक गांधीजी और जिन्ना जैसे नेताओं पर निर्भर रहे हैं। लेकिन दोनों असफल रहे। मुझे ऐसा महसूस होता है कि अब वक्त आ गया है कि लोगों द्वारा ही इस मुद्दे पर निर्णय लिया जाए।
“मैं नहीं समझता कि पाकिस्तान एक ऐसा मुद्दा है जिसे ब्रिटिश सरकार सुलझा सकती है। उनसे ऐसा करने के लिए अनुरोध करना उचित नहीं है और न ही उनके द्वारा इस संबंध में निर्णय लिया जाना न्यायोचित है। पाकिस्तान का प्रश्न स्वनिर्धारण का प्रश्न है अतः इसका फैसला प्रभावित लोगों द्वारा ही लिया जाना चाहिए। यदि यह स्थिति स्वीकार कर ली जाती है तो “द इंडियन कांस्टीटू्यशन प्रीलिमनरी प्रोविजन्स एक्ट” नामक एक अधिनियम संसद को पारित करना होगा।
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उक्त अधिनियम में निम्नलिखित बातों के लिए प्रावधान किए जाने चाहिएः-
(क) पाकिस्तानी क्षेत्र के मुसलमानों का जनमतसंग्रह, विशेष रूप से यह निर्धारण करने के लिए कि क्या वे मुस्लिम बहुल क्षेत्रों को शेष भारत से अलग करना चाहते हैं; (ख) पाकिस्तानी क्षेत्र में रह रहे गैर-मुसलमानों का अलग जनमतसंग्रह, यह जानने के लिए कि वे पाकिस्तान में शामिल होना पसंद करते हैं अथवा हिन्दुस्तान में रहने की इच्छा रखते हैं; (ग) यदि गैर-मुसलमान बहुमत से पाकिस्तान में शामिल न होने का निर्णय लेते हैं तो उन जिलों का निर्धारण करने जहाँ मुसलमानों की बहुतायत है और उनका जिनमें गैर-मुसलमानों की बहुतायत है, एक सीमा आयोग का गठन किया जाए।
* 12 मई, 1943