52 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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नई दिल्ली, 12 जुलाई, 1944
“भारत सरकार के लेबर मेम्बर डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने आज यहाँ एक प्रेस साक्षात्कार में राज गोपालाचारी फार्मूले का स्वागत किया और इसे ’समझदारी की ओर वापसी’ का संकेत बताते हुए 1943 की अपनी योजना की रूपरेखा को दुहराया जिसके अंतर्गत पाकिस्तान का निर्माण दस वर्ष के लिए एक प्रयोग के तौर पर किया जाए और इस अवधि के अंत में यदि पाकिस्तान के मुसलमान हिन्दुस्तान के साथ मिल जाने का फैसला करें तो उन्हें ऐसा करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
उनकी योजना में आगे ब्रिटिश संसद द्वारा एक अधिनियम पारित किए जाने, एक सीमा निर्धारण आयोग का गठन करने और दो जनमतसंग्रह जिसमें से एक में मुसलमान यह निर्धारण करेंगे कि क्या वे बंटवारा चाहते हैं और दूसरे में गैर-मुसलमान यह फैसला करेंगे कि वे पाकिस्तान में ही रहना पसंद करेंगे या फिर बाहर निकलना चाहेंगे कराने का सुझाव दिया गया है। सीमा आयोग
यदि गैर-मुसलमान पाकिस्तान में रहने का निर्णय करते हैं तो पाकिस्तान की सीमाएँ प्रांतों की मौजूदा सीमाएं रहेंगी, जबकि यदि गैर-मुसलमान पाकिस्तान में रहने के प्रति विरोध प्रकट करते हैं तो गैर-मुसलमान बहुल जिलों से मुसलमान बहुल जिलों को अलग करने के लिए एक सीमा आयोग का गठन किया जाएगा।
बहरहाल, डॉ. अम्बेडकर ने गांधीजी द्वारा स्वनिर्धारण का सिद्धांत स्वीकार कर लिए जाने का स्वागत किया लेकिन कहा कि यह अधिक बेहतर होता यदि यह पेशकश उनकी ओर से की गई होती और यह भी बेहतर होता यदि यह पेशकश बिना शर्त होती और स्वतंत्रता की माँग के साथ जोड़ने और पूर्ण राष्ट्रीय सरकार के निर्माण जैसी शर्तें इसके साथ न जोड़ी जातीं।