53 जिन्ना का भय
डॉ. अम्बेडकर के अनुसार उन्हें यह नहीं मालूम कि जिन्ना ने यह प्रस्ताव किस आधार पर ठुकराया। यह तथ्य कि जनमतसंग्रह के दौरान हिन्दू मुसलमानों को प्रभावित करके पाकिस्तान के विरुद्ध मतदान करा सकते हैं, जिन्ना का इस प्रस्ताव को अस्वीकार करने का आधार हो सकता है। लेकिन जनमतसंग्रह ही वह तरीका है जिससे इस प्रकार की समस्याओं का निर्णय किया जा सकता है। डॉ. अम्बेडकर के अनुसार इतिहास में ऐसा उदाहरण नहीं है जब ऐसी समस्या का फैसला जनमतसंग्रह के बिना किया गया हो।
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क्या कांग्रेस मुसलमानों को खरीद लेगी?
डॉ. अम्बेडकर ने स्वीकार किया कि “जनमतसंग्रह में जोखिम तो होता ही है। लेकिन ऐसा जोखिम जिन्ना साहब को उठाना ही पड़ेगा। प्रस्ताव के पीछे जो संजीदगी है वह प्रस्ताव से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। जिन्ना साहब यह प्रस्ताव स्वीकार करने की इच्छा न रखते हों, क्योंकि उन्हें मालूम है कि दरअसल राजगोपालाचारी और कांग्रेस ने यह प्रस्ताव उन्हें गलत साबित करने के लिए किया है और ऐसी पेशकश के साथ ही मुस्लिम वोटों को खरीदने के तौर-तरीके भी निकाल लिए हैं। जिन्ना साहब राजगोपालाचारी से पूछ सकते हैं कि मुसलमानों को पाकिस्तान की पेशकश करने की उनकी मंशा और फिर पेशकश को नकारने में मुसलमानों के दावे में सच कितना था।
इस पेशकश के पीछे की सद्भावना को गांधीजी को सिद्ध करना होगा और यह गारंटी भी देनी होगी कि हिन्दू स्वतंत्र मतदान करने से मुसलमानों को रोकेंगे नहीं।” ख्1,
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1 द फ्री प्रेस ऑफ इंडिया दिनांक 13 जुलाई, 1944