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60 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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सप्रू गलत हैं

नई, दिल्ली, 31 दिसम्बर, 1944

“मध्यस्थता समिति के साथ अनुसूचित जातियों के सहयोग के प्रश्न के संबंध में सर तेज बहादुर सप्रू के पत्र के उत्तर में डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने अपने बयान में कहाः-

“मुझे इस बात पर आश्चर्य है कि सर तेज बहादुर सप्रू को यह शिकायत है कि मैंने इस समिति के साथ सहयोग करने से इंकार कर दिया है। मुझे लगता है कि यदि किसी व्यक्ति को शिकायत होनी चाहिए तो वह व्यक्ति मैं हूँ; न कि सर तेज बहादुर सप्रू।

“मुझे इस बात में कोई संदेह नहीं कि जब उन्होंने अपना काम शुरू किया था तब उन्होंने शुरुआत ही गलत सिरे से की थी। यदि वे यह चाहते थे कि साम्प्रदायिक विवाद के विभिन्न पक्षकार समिति के सामने पेश होने के लिए तैयार रहें तो यह वांछनीय ही नहीं बल्कि जरूरी भी था कि समिति के कार्मिकों के नामों को अंतिम रूप देने से पहले संबंधित पक्षों के नेताओं को उन्हें दिखाते और पूछते कि क्या इस सूची पर उन्हें कोई आपत्ति है। ऐसा करने के बजाए वह कार्मिकों को अपनी इच्छानुसार तय कर लेते हैं और “कार्य सम्पन्न“ होने के बाद वह चाहते हैं कि अब उसे स्वीकार या अस्वीकार किया जाए। समिति को नियुक्त करने और लोगों से विश्वास करने की उम्मीद करने का तरीका चाहे अनर्गल न हो, अनुचित जरूर है।

नाम नहीं बताए गए

“जब सर तेज बहादुर सप्रू ने मुझसे सम्पर्क किया तो उन्होंने मुझे आभास भी नहीं होने दिया कि किन-किन लोगों को वह समिति में शामिल करने जा रहे हैं। हमारी बातचीत केवल सामान्य मुद्दों पर ही हुई थी जैसे विभिन्न समुदायों द्वारा पेश की गई विभिन्न माँगों पर एक निष्पक्ष निकाय द्वारा विचार किया जाना और यह आकलन किया जाना उचित नहीं होगा कि उन माँगों में से कौन सी माँगें उपयुक्त हैं और कौन सी नहीं। मैंने भी इसके बाद उम्मीद की थी कि अब सर तेज बहादुर