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सप्रू मुझे इन लोगों के नाम बताएंगे, जिन्हें वह समिति में रखना चाहते हैं। उन्हांने ऐसा कभी नहीं किया।
“इन परिस्थितियों में, मैंने यदि सर तेज बहादुर सप्रू से कहा कि समिति में शामिल लोगों से मैं संतुष्ट नहीं हूँ, अतः उसके साथ सहयोग का अभिवचन मैं नहीं दे सकता, तो मुझे नहीं लगता कि मैं गलत हूंँ।
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साइमन से तुलना
“सर तेज किसी भी प्रकार यह नहीं कह सकते कि मेरा दृष्टिकोण गैर- जिम्मेदाराना है। यह सब जानते हैं कि सर तेज स्वयं 1929 में साइमन कमीशन का विरोध करने और उससे सहयोग न करने के लिए यह कहते हुए सबसे पहले आगे आए थे कि उस आयोग के सदस्य इस देश के लोगों की आम भावना के अनुरूप नहीं थे।
सर तेज बहादुर सप्रू ने यह बात जरूर कही कि मैंने सहयोग करने से इंकार कर दिया, लेकिन उन्होंने मेरे पत्र के दूसरे भाग का उल्लेख कि मेरी संतुष्टि के अनुसार समिति का गठन करते हैं तब मैं भी सहयोग करने के लिए तैयार हूँ। जाहिर है कि वह यही समझते हैं कि विभिन्न समुदायों द्वारा अपनी माँगों का उल्लेख करते हुए प्रस्तुत किए गए साहित्य एवं प्रस्तावों की जांच करके और विभिन्न समुदायों की भीड़ का सहयोग हासिल करके समिति अपना काम आगे बढ़ा सकती है। निःसंदेह उनका ऐसा करना स्वागतयोग्य है। मैं केवल इतना कहना चाहता हूँ कि उन्होंने मेरे खिलाफ शिकायत की है और मुझे इसमें कोई संदेह नहीं कि इसका कोई कारण नहीं है; और यदि कोई कारण है भी, तो वही इसके जिम्मेवार भी हैं।“-ए.पी.” ख्1,
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1 द फ्री प्रेस ऑफ इंडिया, 1 जनवरी, 1945