64 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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हमें भारत में सभी पार्टियों के बीच सहयोग की
भावना जगाने के लिए कार्य करना चाहिए
“लंदन, 22 अक्तूबर 1946 (रॉयटर)
भारत की संवैधानिक स्थिति के बारे में रॉयटर के संवाददाता के साथ बातचीत के दौरान डॉ. अम्बेडकर ने कहाः
“यह बिल्कुल निश्चित है कि वे मित्र नहीं हैं और वे सहयोगी भी नहीं हैं“ उन्होंने आगे कहा “हम ऐसे लोगों को जानते हैं जो मित्र न होते हुए भी सहयोगी हैं, परन्तु मुस्लिम लीग और काँग्रेस पार्टी ने परस्पर विरोधी होते हुए अन्तरिम सरकार बनाई है। हम क्या उम्मीद कर सकते हैं? इसे शायद ही गठबंधन कहा जा सकता है। दरअसल, एक तरह से यह दो राष्ट्रों द्वारा बनाई गई एक देश की सरकार है।“
डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि भारत में पार्टी की सरकार बनाने का यही समय नहीं है।“वस्तुतः हम तो एक गृहयुद्ध के दौर में हैं।“ उन्होंने जोर देते हुए कहा “आप चाहे इसे गृहयुद्ध न कहना चाहें, लेकिन इसके पीछे भावना यही है। इस समय दरअसल एक गठबंधन सरकार होनी चाहिए जिसमें केन्द्र की सभी पार्टियाँ शामिल हों, ठीक वैसी ही, जैसी कि युद्ध के दौरान ब्रिटेन में थी।
मुझे महसूस होता है कि आने वाले दस वर्ष भारत की नियति की दृष्टि से इतने निर्णायाक होंगे कि जब तक सभी पार्टियाँ मिलकर कार्य न करें तब तक देश को वैसा नहीं बना पाएँगे जैसा कि हम चाहते हैं।“
अम्बेडकर ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि ‘‘हमें यह याद रखना चाहिए कि भारत में हमें ऐसी भावना उत्पन्न करनी होगी।“
इसके बाद भारत में गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया एक्ट, 1935 की धारा 93 जैसी कोई चीज नहीं होगी। चाहे, लोगों ने इसे सख्त नापसंद किया हो, लेकिन धारा 93 अराजकता पर लगाई गई संवैधानिक रोक थी।“ डॉ. अम्बेडकर ने आगे कहा “ब्रिटिश सेना की टुकडि़यां अब नहीं होंगी। यही वह परिस्थितियाँ हैं, जिन्हें ध्यान में रखकर हमें भारत की सभी पार्टियों और लोगों के बीच सहयोग की भावना उत्पन्न करने के उद्देश्य से कार्य करना चाहिए और भविष्य में यही भावना हमारे लिए मददगार होगी।“