27. बरार 15 अगस्त को निजाम के पास वापस जाएगा - Page 90

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किया गया हैं, इसके लिए उप खण्ड ‘क’ में दी गई सीमाओं को देखना होगा जिसमें इसका उल्लेख नहीं किया गया है। यह उप खण्ड इतना सामान्य है कि बरार का विशिष्ट उल्लेख करना अनावश्यक है। बरार का विशेष उल्लेख करना तभी आवश्यक होगा जब इसका मंतव्य सामान्य खण्ड के प्रभाव से इसे बचाने का हो, अन्यथा नहीं। चूंकि इसे बचाने का कोई खण्ड नहीं है, अतः यह उप खण्ड अपने वर्तमान रूप में बरार तथा भारतीय राज्यों के अन्य भू-भागों पर और जो किसी संधि अथवा करार के कारण ब्रिटिश भारत के भाग हैं, उन पर भी पूर्णतः लागू होगा। अतः यह कहना आवश्यक प्रतीत होता है कि श्री वी0 पी0 मेनन, धारा 7 की उप धारा 1 (ख) का मंतव्य नहीं समझ सके हैं और उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में दिए गए उत्तरों से भ्रम की स्थिति उत्पन्न कर दी।

भूभागों का हस्तांतरण

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यह कहना भी उतना ही गलत है, जैसा कि उक्त संवाददाता सम्मेलन में सरदार पटेल ने कहा था कि निजाम के साथ नया करार होने तक बरार की स्थिति यथावत रहेगी। इसका कारण यह है कि यथास्थिति खण्ड में, जो धारा 7 की उप धारा (1) का उप खण्ड (ग) है, भू भागों के हस्तांतरण के संदर्भ में की गई संधियों और करारों तथा सीमा शुल्क, परिवहन, संचार, पोस्ट व टेलीग्राफ तथा इस प्रकार के मामलों से संबंधित संधियों और करारों के बीच भेद किया गया है। यह केवल बाद वाले वर्ग की संधियों को बचाता है। यह ऐसे किसी करार को नहीं बचाता जो भू-भाग के अंतरण से संबधित है। बरार से संबंधित करार वह करार है जो भूभाग के हस्तांतरण से संबंधित है और इसे धारा 7 के उप खण्ड 1 (ख) के प्रभाव से अलग नहीं रखा गया है।

मैं अत्यंत प्रसन्न होऊँगा यदि कोई मुझे बताए कि धारा 7 के अर्थान्वयन की मेरी व्याख्या गलत थी। मैं केवल इतना कहना चाहता हूँ कि भारत के लोग और बरार के लोग धारा 7 को यथा रूप नोट करें और जब इस विधेयक पर हाऊस ऑफ कॉमन्स में बहस हो तब प्रधानमंत्री श्री एटली से सीधे प्रश्न पूछकर इस मामले में स्पष्टीकरण मांगें।“-एपी” ख्1,

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1 द टाइम्स ऑफ इंडिया, दिनांक 5 जुलाई, 1947