72 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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यदि खींची गई सीमारेखा प्राकृतिक नहीं होगी तो यह भारत
के लोगों की सुरक्षा और संरक्षा को भारी खतरे में डाल देगी
नई दिल्ली, 20 जुलाई, 1947
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने आज यहां एक बयान में कहा कि पंजाब और बंगाल का विभाजन कोई स्थानीय समस्या नहीं है जिसे इन दोनों प्रांतों के लोगों पर छोड़ा जा सके, बल्कि यह एक “अखिल भारतीय समस्या” है क्योंकि इसमें पाकिस्तान और भारत की सीमाओं का निर्धारण शामिल है और यह निर्धारण प्रथमतः रक्षा और प्रशासनिक सुविधा पर विचार करके किया जाना चाहिए।”
डॉ. अम्बेडकर ने कहाः पश्चिमी पंजाब और पूर्वी पंजाब के बीच और पश्चिमी बंगाल तथा पूर्वी बंगाल के बीच सीमारेखा के निर्धारण के बारे में चल रहे विवादों की समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों और मुसलमानों व गैर-मुसलमानों द्वारा सीमा आयोग को प्रस्तुत ज्ञापनों से यह स्पष्ट है कि सीमा आयोग के परिणाम देश के लिए विनाशकारी हो सकते हैं।
“सबसे पहले तो इस समस्या को एक स्थानीय समस्या के तौर पर लिया गया और पंजाब व बंगाल के लोगों को आपस में लड़ने के लिए छोड़ दिया गया। दूसरे, स्थानीय लोग इसे जमीन हड़पने की समस्या मानते हैं। जमीन की इस छीना-झपटी में राष्ट्रीय सीमारेखा को आगे पीछे खिसकाने के लिए गैर-मुसलमान इलाकों से मुसलमानों को खींचकर मुसलमान इलाकों में लाने और मुसलमान इलाकों से अधिकाधिक गैर-मुसलमानों को गैर-मुसलमान इलाकों में लाने के उद्देश्य से गैर-मुसलमान इलाकों में मुसलमान बस्तियों और मुसलमान इलाकों में गैर-मुसलमानों की बस्तियों को ढूंढने की पुरजोर कवायद की जा रही है।
“मेरे मतानुसार ये दोनों विधियाँ गलत और गुमराह करने वाली हैं। बस्तियों को देखते हुए राष्ट्रीय सीमारेखाओं को आगे पीछे करना न्यायोचित होता, यदि यह स्वीकार्य होता कि पाकिस्तान और हिन्दुस्तान समांगी देश होने चाहिए। लेकिन यह