28. यदि खींची गई सीमारेखा प्राकृतिक नहीं होगी तो यह भारत के लोगों की सुरक्षा और संरक्षा को भारी खतरे में डाल देगी - Page 92

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विभाजन का आधार नहीं है, जो इस तथ्य से स्पष्ट है कि आबादी के स्थानांतरण की बात न कांग्रेस ने कही है और न ही मुस्लिम लीग ने। राष्ट्रीय सीमारेखा को चाहे जैसे बनाया-बिगाड़ा जाए, पाकिस्तान में बहुत बड़ी संख्या में गैर-मुसलमान बने रहेंगे और वैसी ही बड़ी संख्या में मुसलमान भारत में रहेंगे। इस वजह से अपनी बिरादरी के अधिकाधिक लोगों को अपने पाले में लाने के लिए सीमारेखा को आगे-पीछे करना मेरे विचार में अत्यंत मूर्खतापूर्ण कार्य है। रक्षा

दूसरे, यह समस्या स्थानीय समस्या होती यदि पाकिस्तान और भारत दो प्रभुसत्ता संपन्न स्वतंत्र देश नहीं होते। लेकिन तथ्य यह है कि ऐसी स्थिति पैदा होने पर उनमें से प्रत्येक अतिक्रमण अथवा आक्रमण से स्वयं की रक्षा करेगा।

इस बात को देखते हुए, पंजाब और बंगाल का विभाजन एक स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि अखिल भारतीय समस्या है, क्योंकि इसमें पाकिस्तान और भारत की सीमारेखाओं का निर्धारण शामिल है और यह निर्धारण प्रथमतः रक्षा एवं प्रशासनिक सुविधा को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

उपर्युक्त बातों को ध्यान में रखते हुए, पाकिस्तान सरकार और भारत सरकार सीमा आयोग के समक्ष न केवल उचित पक्षकार होंगे अपितु वे ही आवश्यक पक्षकार भी होंगे। भारत और पाकिस्तान के बीच की सीमारेखाएं भारत की सीमा होने के कारण भारत सरकार के रक्षा विभाग द्वारा इस बात पर जोर दिया जाना चाहिए था कि सीमा आयोग में निर्धारणकर्त्ताओं के रूप में सैन्य अधिकारियों को शामिल किया जाना चाहिए, जैसा कि दो देशों के बीच सीमाओं के निर्धारण में किया जाता है।

भारत सरकार का रक्षा विभाग न केवल इस मामले में कार्रवाई करने में असफल रहा, बल्कि उसने सीमा आयोग के सामने पेश होकर रक्षा एवं प्रशासन की दृष्टि से यह मामला उठाने की जहमत भी नहीं उठाई। शायद वह भूल गया है कि सरहद की निगरानी पूर्वी पंजाब या पश्चिमी बंगाल की जिम्मेवारी नहीं होगी। शुरू से लेकर आखिर तक यह जिम्मेवारी भारत सरकार की होगी और यही कारण है कि सीमाओं के निर्धारण में अपनी भूमिका रखना रक्षा विभाग का पहला सरोकार होना चाहिए था।

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प्राकृतिक सीमाएँ

इस बात से किसी को इंकार नहीं कि रक्षा और प्रशासन के दृष्टिकोण से भारत और पाकिस्तान के बीच की सीमाएँ प्राकृतिक सीमाएँ होनी चाहिए अर्थात वे किसी नदी अथवा पर्वत के साथ-साथ चलनी चाहिए। सीमा आयोग को प्रस्तुत ज्ञापनों में