28. यदि खींची गई सीमारेखा प्राकृतिक नहीं होगी तो यह भारत के लोगों की सुरक्षा और संरक्षा को भारी खतरे में डाल देगी - Page 93

74 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उठाए गए मुद्दों के स्वरूप से यह स्पष्ट है कि इन कारकों पर जैसा विचार किया जाना चाहिए उतनी गंभीरता से विचार नहीं किया जाएगा।

इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया है और उल्लेख भी नहीं किया गया है। खतरा यह है कि सीमा आयोग के परिश्रम से भारत और पाकिस्तान के बीच जो सीमाएँ उभर कर आएंगी, वे तत्काल प्रभावित समुदायों के दृष्टिकोण से चाहे जितनी संतोषजनक हों, परन्तु भारत के दृष्टिकोण से तो अत्यंत असंतोषजनक होंगी।

यदि मेरा डर सही साबित होता है और सीमा आयोग द्वारा खींची गई सीमारेखा प्राकृतिक सीमारेखा नहीं है तो किसी पैगम्बर को आकर यह बताने की जरूरत नहीं कि भारत की सरकार को इसका रखरखाव करना बहुत महंगा पड़ेगा और इससे भारत के लोगों की सुरक्षा और हिफाजत गंभीर खतरे में पड़ जाएगी। अतः मुझे उम्मीद है कि चाहे जितनी देर हो चुकी हो रक्षा विभाग हरकत में आएगा और बहुत देर होने से पहले ही अपने कर्त्तव्य का निर्वहन करेगा।“-एपीआई” ख्1,

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1 द फ्री प्रेस जर्नल, दिनांक 21 जुलाई, 1947