29. विधि के समक्ष भारत के नागरिकों के अधिकार समान हैं एलन कैम्पबेल की डॉ. अम्बेडकर के साथ बातचीत - Page 94

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एलन कैम्पबेल की डॉ. अम्बेडकर के साथ बातचीत :-

गवर्नमेंट हाऊस, नई दिल्ली

शनिवार, 24 अप्रैल, 1948

चमचमाती रोशनी में नहाए दिल्ली जिमखाना क्लब के लॉन पर मैं भी उनके साथ रात्रिभोज में शामिल था। हमारे मेजबान थे श्री कृष्ण (दिल्ली के जानेमाने राजनैतिक संवाददाता), जिन्होंने एक दिलचस्प पार्टी वहाँ रखी थी। मुख्य अतिथि थे कानून मंत्री, अछूतों के नेता और पिछले बीस वर्षों में भारतीय राजनीति में बहुरंगी व्यक्तित्व के धनी डॉ. भीमराव अम्बेडकर। वह भारत के नए संविधान के निर्माण से जुड़े प्रमुख लोगों में से हैं, जिसने छुआछूत के कलंक को कानून की किताब से निकाल बाहर किया है। डॉ. अम्बेडकर खुद एक अछूत हैं जिन्होंने हाल ही में एक ब्राह्मण डॉक्टर महिला से विवाह किया है। सदियों पुराने रीति-रिवाज को यों तो एक दिन में उखाड़ नहीं फेंका जा सकता, लेकिन इस आयोजन ने काफी गहमा-गहमी पैदा कर दी थी। उनकी पत्नी भी पार्टी के दौरान उनके साथ थीं, लेकिन सामाजिक आयोजनों में भारतीय महिलाओं के साथ जैसा अक्सर होता है, वह ज्यादा बोली नहीं।

डॉ. अम्बेडकर खुद गंभीर विचार मुद्रा में थे और उन्होंने नए संविधान की कुछेक विशेषताओं की विश्लेषणात्मक व्याख्या भी प्रस्तुत की। उदाहरण देते हुए उन्होंने उल्लेख किया कि इसके प्रावधानों के अंतर्गत न्यायपालिका के लिए आरक्षित विशेष अधिकार यूनाइटेड स्टेट्स के सर्वोच्च न्यायालय को प्राप्त अधिकारों से भी व्यापक हैं। 1935 के अधिनियम के सतत् गुणता के बतौर उदाहरण पेश करते हुए उन्होंने कहा कि नए संविधान के अनुच्छेदों में इससे संबंधित दो सौ पचास खण्ड शामिल किए गये हैं।

कैबिनेट सरकार पर भी हमने चर्चा की, और डॉ. अम्बेडकर ने एक शिकायत का हवाला देते हुए कहा कि भारत में सरकार की मौजूदा प्रणाली बहुत ही धीमी