76 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
गति से काम करती है। उनका ख्याल था कि जहाँ दो विभागों को प्रभावित करने वाला नीति विषयक कोई मामला हो तो इसका निपटान संबंधित मंत्रियों के स्तर पर तुरंत किया जाना चाहिए। उन्होंने सेड्स प्रस्तावों पर गैर-विभागीय कैबिनेट प्रमुखों की प्रणाली पर टिप्पणी की जिनके मातहत विभाग में उन प्रमुखों का एक समूह हो। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का अफसोस है कि माऊंटबेटन संविधान पारित होने से पहले ही विदाई ले रहे हैं। उन्होंने महसूस किया राष्ट्रकुल के मुद्दे का निर्णय संविधान सभा के बाहर ही किए जाने की संभावना है।“ (एलन कैम्पबेल-जॉनसन द्वारा लिखित मिशन विथ माऊंटबेटन, पृष्ठ 318-20)।
भारत का संविधान, जिसे लॉर्ड माऊंटबेटन के कार्यकाल के दौरान जोरशोर से तैयार किया गया और उस पर विचार-विमर्श किया गया, पश्चिम की स्वतंत्रता की भावना का मिलाजुला रूप है। इस दस्तावेज का दृष्टिकोण और भारतीय जीवन के यथार्थ का अन्तर उसके दृष्टिकोण को नष्ट नहीं करता। यह ब्रिटिश विचारधारा में निहित स्वतंत्रतावादी प्रभाव का प्रतिनिधित्व करता है और साम्प्रदायिकता के मंसूबों और आकांक्षाओं की जड़ों पर सीधा प्रहार करता है। भारत का संविधान उन आठ करोड़ अछूतों में नई आशा जगाता है, जिनकी छाया से मतांध परम्परावादी हिन्दुओं के अनुसार भी भोजन भी अपवित्र हो जाता था, लेकिन अब वे भी भारत के नागरिक हैं और कानून के सामने उन्हें भी बराबर का अधिकार है। यह उल्लेखनीय है कि डॉ. अम्बेडकर नेहरू सरकार के प्रमुख व्यक्ति और संविधान का निर्माण करने वाले महानुभावों में से एक हैं और अस्पृश्य समझी जाने वाली जातियों के जानेमाने नेता हैं।” ख्1,
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1 एलन कैम्पबेल-जॉनसन द्वारा लिखित मिशन विथ माऊंटबेटन, पृ. 361-362
पुनर्मुद्रण, खैरमोडे, भाग 10 पृ. 36-38