80 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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अध्यात्मिक भोजन से अधिक भौतिक पदार्थों पर ध्यान दें
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पूना पैकेट के बाद सभी अछूत डॉ. अम्बेडकर को सुनने का अवसर पाने को आतुर थे। इस परिस्थिति में वारली, बम्बई के युवकों ने एक जनसभा रखी। यह सभा बी.डी.डी. चॉल के खुले मैदान में बुधवार 28 सितम्बर, 1932 को हुई। इस सभा की अध्यक्षता श्री देवराव नायक ने की । ख्1,
डॉ. अम्बेडकर, जिन्होंने अपने ही ढंग से नासिक मंदिर प्रवेश का जोरदार आन्दोलन चलाया था, ने अब अपने आन्दोलन की पतवार की दिशा को तीव्रता से बदल दिया था। उन्हांने अपने लोगों को अपनी सारी शक्ति राजनीतिक ताकत प्राप्त करने में लगाने को प्रेरित किया। डॉ. अम्बेडकर ने सभा संबोधन में कहा :-
‘‘मंदिर प्रवेश आंदोलन का लक्ष्य ठीक था। परन्तु आप आध्यात्मिक भोजन से अधिक भौतिक भलाई पर ध्यान दें। पैसे की कमी के कारण तुम्हें खाने को भोजन नहीं मिलता, पहनने को कपड़े नहीं मिलते, बच्चों की पढ़ाई के अवसर नहीं मिलते और चिकित्सा सुविधा नहीं मिलती। इसलिए, आप राजनीतिक सहभागिता पर ध्यान दें, अपनी शक्ति विकसित करें और जीवन में धन प्राप्ति तथा भौतिक बढ़ोतरी के लिए संघर्ष करें’’ डॉ. अम्बेडकर ने श्रोताओं से इस सभा में आंदोलन के मुख्यालय के लिए एक भवन निर्माण के लिए धन जुटाने के बारे में जोरदार अपील की।’’ ख्2,
1 2 कीर, पृष्ठ सं. 217-218जनता : 8 अक्तूबर, 1932