82 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
| nk | Col2 | l | r |
|---|
| Col1 | Col2 |
|---|---|
| fo | 17 opk |
|---|---|
| Col1 | Col2 |
|---|---|
| R; | kx |
|---|
28 अक्टूबर 1932 को ‘सर कावसजी जहांगीर हाल’ में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर को रूसी समाज ने एक सम्मान पत्र भेंट किया। अछूत नेता डॉ. पी.जी. सोलंकी ने सभा की अध्यक्षता की। समता सैनिक दल के स्वयं सेवक व्यवस्था तथा रख रखाव की देखभाल के लिए उपस्थित थे। ख्1,
डॉ. अम्बेडकर ने अपने लोगों को मंदिर प्रवेश आन्दोलन तथा पारस्परिक भोज की भूल भुलैया में खो जाने के विरुद्ध चेताया। उन्हांने समझाया कि इससे उनकी दाल-रोटी की समस्या हल नहीं होगी। ‘‘इस मूर्खतापूर्ण धारणा कि तुम्हारी कंगाली तथा विपदा ईश्वर द्वारा निर्धारित है जितनी जल्दी त्याग दो उतना ही तुम्हारे लिए बेहतर है। यह विचार कि तुम्हारी गरीबी अवश्यंभावी है, जन्मजात है तथा मृत्युपर्यन्त है कोरी झूठ तथा गलत है। उन्होने आगे कहा कि अपने आपको दास, समझने वाली विचार-धारा को त्याग दो। ख्2,
12 जनता : 5 नवंबर, 1932 कीर, पृष्ठ सं. 219