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शनिवार 18 फरवरी, 1933 को कसारा में ठाणे जिला अधिवेशन की अध्यक्षता डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने की। डॉ. अम्बेडकर कार द्वारा बम्बई से कसारा 8 बजे रात्रि पहुंचे। सर्वश्री शिवतरकर, दिवाकर पगारे और गणपत बुवा जाधव छद्मनाम मड़केबुवा, डॉ. अम्बेडकर के साथ गये जबकि श्री. बी.के. गायकवाड़ और के.बी. जाधव, लिम्बाजी भालेराव और रोकड़े नासिक से पधारे। स्वागत समिति के अध्यक्ष श्री शंकरनाथ बर्वे थे। ख्1,
मंदिर प्रवेश बिल के संबंध में वक्तव्य देने के बाद डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने आध्यात्मिकता का क्षणिक प्रचलन तथा अंधविश्वास के विरोध में दुष्प्रचार के बारे में कहा कि इन बुराइयों ने दलितों को युगों से शक्ति विहीन किया है और उनकी पौरुषता को समाप्त कर दिया है। रोटी भगवान की पूजा से बेहतर है, कहकर उन्होंने लोगों के मन तथा मस्तिष्क पर छाप छोडी़। अधिवेशन में डॉ. अम्बेडकर ने अछूतों से कहा, ‘‘हमें हिन्दू धर्म में समता चाहिए। चतुर्वण व्यवस्था को उखाड़ फेंकना होगा। उच्च जातियों के लिए विशेष सुविधाएें और निम्न वर्गों के लिए गरीबी के सिद्धान्त का अब अंत होना चाहिए। ब्रिटिश सरकार विदेशी सरकार है, इसलिए हमारी दशा में अधिक प्रगति नहीं है। फूट को अपने ऊपर हावी न होने दें। आपसी फूट सर्वनाष की ओर ले जाती है। परिवेश परिस्थितियों का स्वयं की दृष्टि से अध्ययन करें। यह न भूलें कि महाड़ तथा नासिक की तुम्हारी मुठभेड़ से तुम्हें शीघ्र ही राजनीतिक प्रतिष्ठा मिलने वाली है। नासिक सत्याग्रह के समाचार लन्दन के ‘‘टाइम्स’’ में हर दिन छपते थे तथा इनसे ब्रिटिश निवासियों में हमारे बारे में जानने की रुचि बढ़ी और उन्हें सीखने को मिला।
उन्होंने आगे कहा, ‘‘तुमने जो खोया, उससे दूसरों को लाभ हुआ। तुम्हारे अपमान से दूसरों का गौरव बढ़ता है। तुम्हें अभावों की जिन्दगी जीने को मजबूर, वस्तुओं से वंचित तथा अपमानित किया जाता है, क्योंकि वे जो तुमसे ऊपर हैं, प्रबल तानाशाह हैं और अविश्वसनीय हैं और यह किसी भी तरह तुम्हारे पूर्वजन्म में किये पापों का फल नहीं है। तुम्हारे पास कोई जमीन नहीं है क्योंकि दूसरों ने हड़प ली है। तुम्हारे पास कोई पद नहीं है क्योंकि दूसरों ने उन पर एकाधिकार बना लिया है। भाग्य के भरोसे न रहो, अपनी शक्ति में विश्वास रखो’’। ख्2,
12 जनता : 25 फरवरी, 1933 कीर, पृष्ठ सं. 239