19. फरवरी, 1933 करेंगे जो संघर्ष, होंगे वे कामयाब। - Page 105

84 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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करेंगे जो संघर्ष, वे होंगे कामयाब

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फरवरी 1933 के अंतिम सप्ताह में मझगांव, बम्बई में एक जनसभा का आयोजन हुआ। इस सभा में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने कहा-

‘‘आज मेरी स्थिति वैसी है जैसी एक बार तिलक की थी। जब तक मेरे विराधी मेरे बारे में अपशब्द बोलते हैं मैं विश्वस्त हो जाता हूं कि मेरा आपके लिये संघर्ष ठीक ढंग से चल रहा है। पिछले 2000 वर्षों में कभी भी अस्पृश्यता को जड़ से समाप्त करने का कोई प्रयास नहीं किया गया। अछूतों को अब विष्वास हो गया है कि दलित वर्ग के समर्थन के बिना स्वराज की मांग तथा हिन्दुओं के उद्देश्य पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। हिन्दू कुछ भी तुम्हारे प्रति दया भाव या दान की भावना से नहीं करते। वे यह सब अपने कल्याण व स्वार्थ के लिए ही करते हैं। हमारे आन्दोलन का ध्येय तानाशाही, अन्याय तथा झूठी रीति की परम्पराओं के विरोध में लड़ना और शक्तिशाली वर्ग की विशेष सुविधाओं और विशेषाधिकारों को हटवाना और पीडीत लोगों को दासता की बेडि़यों से मुक्ति दिलाना है। हमारी अनथक निरन्तर लड़ाई से हमारे ध्येय को मान्यता प्राप्त हो गई है।’’

‘‘मृत पशुओं का मांस खाना छोड़ दें।’’ मेरे से लोग पूछते हैं, ‘‘तो वे क्या

खायें?’’ इसके उत्तर में मैं आपको एक गुणवान तथा चरित्रवान नारी का उदाहरण स्मरण रखने को कहूंगा। उसके कितने भी बुरे दिन क्यां ना आ जाऐं वह कभी वेश्यावृति को स्वीकार नहीं करती। वह आत्म सम्मान के लिए पीड़ा सहती है। इस दुनिया में आप आत्म सम्मान के साथ जीना सीखो। आपको इस दुनिया में कुछ करने की महत्वाकांक्षा को संजोए रखना है। जो करते हैं संघर्ष वे होते हैं कामयाब। आप में से कुछ एक ने एक गलत धारणा बना रखी है कि आप प्रगति नहीं कर सकते। परन्तु स्मरण रहे कि बेबसी या लाचारी का युग समाप्त हो गया है और एक नया युग शुरू हो गया है। इस देश में अब आपकी राजनीति और विधान सभा और विधान परिषद में सहभागिता से कुछ भी संभव है, अर्थात् असंभव कुछ भी नहीं’’। ख्1,

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1 कीर, पृष्ठ सं. 233-34