20. 4.3.1933 ईश्वर या दैविक शक्ति पर आश्रित न हों। - Page 106

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‘‘शनिवार 4 मार्च, 1933 को 9ः30 रात्रि, बम्बई सैंडहर्स्ट मार्ग के समीप जी.आई.पी. रेलवे आवास के मैदान पर अछूतों की एक सभा हुई। श्री आर.डी कावली बी.ए.एल.एल. बी. का नाम अध्यक्ष पद के लिए पंजाजी जाधव ने प्रस्तावित किया और श्री करड़क ने इसका समर्थन किया। यह सभा डॉ. बी.आर. अम्बेडकर को 85 लोगां द्वारा हस्ताक्षरित सम्मान पत्र भेंट करने के लिए बुलाई गई थी। इस अवसर पर एक विशाल पण्डाल निर्मित किया गया था जो खचाखच भरा था। शिवतरकर, नायक, सहस्रबुद्धे, दिवाकर पगारे, उपश्याम, कमलकांत चित्रे, मेशराम इत्यादि प्रतिष्ठित नेता उपस्थित थे’’ ख्1,

दिवाकर पगारे ने डॉ. अम्बेडकर के सम्मान में सम्मान पत्र पढ़ा। सम्मान पत्र के उत्तर में डॉ. अम्बेडकर ने कहा,

बहनों और भाईयो

‘‘आपने मुझे जो सम्मान पत्र भेंट किया है मैं उसके लिए आप सबका आभार व्यक्त करता हूं। यह सम्मान पत्र मेरे काम और गुणों के लिए प्रशंसा से भरा है। इसका अर्थ है कि आप अपने जैसे ही एक साधारण मनुष्य को ‘पूजा की वस्तु’ मान रहे हैं। यह नायक पूजा की सोच अगर तुरंत समय रहते नहीं रोकी गई तो यह आप का विनाश कर देगी। किसी एक व्यक्ति को पूज्यनीय बनाकर आप अपनी सुरक्षा तथा मुक्ति का दायित्व उस अकेले व्यक्ति पर डाल कर भारमुक्त हो विश्राम मुद्रा में चले जाते हैं और आप में आश्रित रहने तथा अपने कर्तव्य के प्रति उदासीनता की आदत पड़ जाती है। अगर आप ऐसे विचारों के शिकार बन जाते हैं तो आपका भाग्य राष्ट्र की जीवन धारा में बहते कटे लकड़ी के लट्ठे से बेहतर तो नहीं हो सकता। आपका संघर्ष तो शून्य हो जाएगा।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘नवयुग ने आपको जो राजनीतिक अधिकार उपलब्ध कराये हैं उनकी उपेक्षा मत करो। आपका पूरा समाज अब तक पैरों तले रौंदा जा रहा था क्योंकि आपके मन तथा मस्तिष्क मे बेबसी भरी थी। मैं यह भी कहूंगा कि

1 जनता, 11 मार्च, 1933