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लन्दन प्रस्थान की पूर्व संध्या को पूना के दलित वर्गों ने 23 अप्रैल, 1933
को दामोदर हाल बम्बई में डॉ. अम्बेडकर को सम्मान पत्र भेंट किया। इस सभा में 8
से 10 हजार लोग एकत्रित हुए। रायबहादुर एस.के. बोले ने सभा की अध्यक्षता की।
श्री पी.एल. लोखंडे ने श्रोतालाभ के लिए सम्मान पत्रा पढ़ा और श्री हरि भाउ हनुमंत
रोकड़े के कर कमलों से दलित वर्ग संघ पुणे जिले की ओर से डॉ. अम्बेडकर को
भेंट किया। इस अवसर पर अनेक जिला समितियों ने उनके द्वारा इकठ्ठी की गई
अलग-अलग धनराशि भी डॉ. अम्बेडकर को भेंट की।
‘‘सभा को संबोधित करते हुए डॉ. साहेब ने बताया कि गोलमेज अधिवेशन
के दूसरे सत्र की सभा में जाते समय वे बेबस थे। वे गांधी को समर्थन देकर ब्रिटिश
सरकार से विमुख नहीं हो सकते थे क्योंकि गांधी दलित वर्ग के लिए कुछ भी मानने
को तैयार नहीं थे। उन्होंने घोषणा की कि उनकी दलितों के अधिकारों की लड़ाई
सफलता के करीब है। वे अपनी संपूर्ण शक्ति देश के लिए सर्वाधिक संभव शक्ति
प्राप्त करने में लगा देंगे। सभा के अंत में उन्होंने अपने लोगों से अनुरोध किया कि
वे उन्हें व्यवहारिक विदाई देने के लिए बैलार्ड स्तम्भ पर न आयें। उन्होंने कहा कि
अपना एक दिन का वेतन खोकर वे ऐसा कतई न करें’’ ख्2,
1 जनता : 29 अप्रैल, 1933
2 कीर, पृष्ठ 238