88 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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डॉ. बी. आर. अम्बेडकर की अध्यक्षता में ‘‘कोलाबा जिले की खेतिहर’ सभा का तष्तीय अधिवेशन रविवार, 16 दिसम्बर, 1934 को अलीबाग तालुका के चारी में रखी गई। किसानों ने स्वयं ही इसकी प्रारम्भिक व्यवस्था की। पर्याप्त लम्बा चौड़ पंडाल निर्मित किया गया था और पंडाल के बीचों बीच सम्मानित मेहमानों के बैठने के लिए मंच पर जो चबूतरा बना था, उस स्थल को झण्डों व रंग बिरंगी झंडियों से सजाया गया था। जगह-जगह कपड़े के बैनर लटकाए गये थे, उन पर कुछ नारे जैसे ‘‘खेतिहरों की विजय’’, खेतिहरो एक हो’’ इत्यादि लिखे थे। डॉ. अम्बेडकर का सरल, रेवास, हाशिउरे, नरींगी इत्यादि के खेतिहरों ने फूल मालाओं से स्वागत किया। अधिवेशन के लिए पूरे जिले से लगभग 6000 खेतिहरों का जमावड़ा था। उनमें सर्वश्री जी.एन. सहस्रबुद्धे बुधे (बम्बई एस.एस.संघ), एम.वी.डोंडे (मुख्य प्राचार्य, परेल उच्च विद्यालय), एस.वी. पारूलेकर (भारत सेवक संघ), डी.वी. प्रधान, के.वी. चित्रे, टी.वी. पारवते (संपादक मराठा), एस.जी. टिपनिस, सी.जी. देश पाण्डे, एन.एम. देश पाण्डे, सूबेदार सावड़कर, दामुअन्ना पोटनिस (भोर प्रजा परिषद) और अन्य तथा श्री अर्देशिर बारिया पेज़ारी के जमींदार भी उपस्थित थे। वहाँ अलीबाग के मामलातदार, पुलिस उपनिरीक्षक और अन्य सरकारी अधिकारी उपस्थित थे।
श्री एन.एन पाटिल, अध्यक्ष स्वागत समिति ने प्रतिनिधियों का अभिनन्दन किया।
डॉ. अम्बेडकर का भाषण
जैसे ही डॉ. साहब भाषण के लिए उठे पंडाल ‘डॉ. अम्बेडकर की जय जयकार’ से गूंज उठा।
उन्होंने कहा, :-
आपको अपनी शिकायतों को दूर करने के लिए ध्यान केन्द्रित कर उपाय सोचने हैं। ‘शेतकारी’ के सम्बन्ध में मैं आपको बताना चाहता हूं कि आपकी भाषा में इस शब्द का गलत उपयोग हो रहा है, यह ऐसे लोग, जो बहुत अधिक जमीन के मालिक हैं कोई भी शारीरिक परिश्रम वाला कार्य कृषि के लिए नहीं करते और वे