23. 13.10.1935 दुर्भाग्य वश मैं एक अछूत हिन्दू जन्मा था, परन्तु मैं एक हिंदू नहीं मरूंगा। - Page 114

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अपने किए पर किसी भी प्रकार का पछतावा न होना प्रदर्षित कर, इस आन्दोलन की व्यर्थता को उजागर कर दिया है। उन्होंने अपने लोगों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि भविष्य में उनका आचार ऐसा हो जिससे बाहरी दुनिया में किसी को भी आपके हिन्दू समुदाय से पृथक और उनकी धार्मिक आस्था से किसी भी प्रकार का संबंध न रखने के बारे में कोई शंका न रहे। इस प्रकार आप अपने लिए एक स्वतंत्र नागरिक के उपयुक्त भविष्य तराशें।

तदनुसार, सम्पूर्ण चर्चा के बाद छूत हिन्दुओं के दलितों की सामाजिक समता की मांग के प्रति बेदर्द हृदयहीनता में व्यवहारवाली मानसिकता और अपराध संबंधी तटस्थता को ध्यान में रखते हुए एक संकल्पबद्ध प्रस्ताव पास किया गया। इसके अंतर्गत आदेश दिया गया कि दलित वर्ग का दस वर्ष से चल रहा अछूतों की प्रतिष्ठा तथा शक्तिशाली समाज बनाने के लिए दोनों समुदायों को दृढ तथा सबल करने के अभियान को विराम दिया जाए। इसके अतिरिक्त अछूतों को प्रोत्साहित करते हुए आग्रह किया कि अछूत असफल प्रयासों में अपनी शक्ति व्यर्थ न गवाएं, वे अपने आप को एक उच्च स्तर तथा प्रतिष्ठा प्राप्त करने में लगाएं तथा हिन्दुस्तान के दूसरे समुदायों के साथ समता के आधार पर अपने लिए स्वतंत्र स्थान बनायें। ख्1,

‘‘डॉ. अम्बेडकर अपने सिपहसालारों के साथ येवला से प्रस्थान कर नासिक ठहरे। उनके वहां रहते सफाई कर्मी (मेघवाल समुदाय से) ने रात्रि का भोजन तथा चाय-पान से 15 और 16 अक्तूबर 1935 को स्वागत किया’’ ख्2,

डॉ. बी.आर. अम्बेडकर हिन्दू धर्म को त्यागने तथा किसी और किसी अन्य धर्म को ग्रहण करने का समाचार पूरे विश्व में विस्तृत रूप से फैलाया। यह घोषणा बेदर्द हिन्दू समाज के लिए एक भीषण तूफ़ान की भांति थी। यह घोषणा वज्रपात की तरह थी और हिन्दू आश्चर्यचकित व हतप्रभ रह गये। हिन्दुओं तथा हिन्दू रक्षात्मक समूहों में भयंकर क्रोध का वातावरण था। इस समाचार को लेकर इन समूहों में अत्यधिक प्रतिक्रिया थी जो इस प्रकार थी।

-संपादक

‘‘निर्दयी तथा मानव जाति से घृणा करने वाले रूढिवादी हिन्दुओं को दलितवर्ग के इस निर्णय ने प्रभावित नहीं किया। वे इतने जर्जर तथा खोखली अवस्था में थे कि उनके दिमाग कुंठित थे और देख नहीं पाते थे। गैर-ब्राह्मण अशिक्षितों ने सोचा कि धर्म संबंधी बातों का निर्णय ब्राह्मणों के पाले में है। येवला निर्णय पर

खुशियां मनाई, सनातनी हिन्दुओं ने चैन की सांस ली और नासिक के सनातनी

12 कीर, पृष्ठ सं. 252-53 खैरमोड़े, पुस्तक 6 पृष्ठ 86