98 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कहा कि उनके द्वारा समझौते के लिए सुझाई गई शर्तों में से यह शर्त कि हिन्दू मत में रहकर समानता की लड़ाई हमेशा चलती रहेगी सवर्ण हिन्दू कभी भी पूरी नहीं करेंगे क्योंकि रोटी और मक्खन तो कभी चर्चा या विवाद के विशेष बिन्दु नहीं रहे। निस्संदेह इस सारे झगड़े में कोई पक्का अध्यात्मिक कारण रहा है। अन्यथा धन देने के प्रस्ताव न आते- विरोधी शिविरों से ऐसी अफवाह है कि निज़ाम ने सात करोड़ रूपये तक देने का प्रस्ताव किया ख्2, । उन्होंने कहा शायद यह ईश्वर के लिए संभव नहीं था। गांधी द्वारा शुरू किए गए हरिजन धनराशि की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसका प्रयोजन अछूतों को ‘‘सवर्ण हिन्दू शिविर’’ में दास बनाकर रखना है। उन्होंने घोषणा की कि सवर्ण हिन्दू सहायता करें या अड़चनें पैदा करें, वे तो धर्म परिवर्तन करेंगे ही। अगर वे साक्षात ईश्वर से भी मेरे ऊपर धर्म परिवर्तन न करने का दबाव डलवायें तो भी मैं अपने निर्णय को नहीं बदलूंगा’’। ख्3,
23 एम.वी.डोंडे, जनता : 14 अप्रैल, 1951 कीर, पृष्ठ सं. 261-263.