29. 31.5.1936 मुक्ति का मार्ग क्या है? - Page 130

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धर्म परिवर्तन की आवश्यकता

मेरे धर्म परिवर्तन की घोषणा के पश्चात हमारे आदमियों ने विभिन्न स्थानों पर बहुत सी सभाएँ गठित की और अपने मत तथा विचार प्रकट किए जो आप तक पहुंच गए होंगे। लेकिन हमें पहले कभी इकट्ठे होकर धर्म परिवर्तन समस्या पर विमर्श तथा निर्णय लेने का अवसर नहीं मिला। मुझे इस अवसर की बहुत प्रतीक्षा थी। आप सभी सहमत होंगे कि धर्म परिवर्तन आंदोलन को सफल बनाने की योजना अत्याश्यक है। धर्म परिवर्तन बच्चों का कोई खेल नहीं है। यह एक मनोरंजन का विषय नहीं है। यह मानव जीवन को सफल बनाने से संबंधित है। जिस तरह एक नाविक अपनी लंबी यात्रा शुरू करने से पहले अपनी सभी आवश्यक तैयारी कर लेता है, उसी तरह हमें भी पूरी तैयारी करनी चाहिए। इसके बिना दूसरे किनारे तक पहुंचना असम्भव हैं। लेकिन जैसे एक नाविक तब तक सामान नहीं लादता जब तक कि उसे कितने मुसाफिर नाव पर चढ़ाने हैं का अन्दाजा नहीं लग जाता। मेरी भी स्थिति वैसी ही है और मैं सही तथ्यों के बगैर धर्म परिवर्तन आंदोलन को आगे नहीं बढ़ा सकता। जब तक मुझे यह पता नहीं कि कितने लोग हिन्दू धर्म त्यागने को तैयार हैं, मैं धर्म परिवर्तन की तैयारी शुरू नहीं कर सकता। जब मैंने बम्बई के कुछ श्रमजीवियों के सामने यह प्रकट किया कि मैं धर्म परिवर्तन के बारे में लोगों की राय सभा में मिले बगैर जानने में सक्षम नहीं हूं, उन्होंने स्वेच्छा से सभा को बुलाने का दायित्व बिना

खर्चे तथा बिना मजदूरी वहन किया। हमारे आदरणीय नेता तथा स्वागत समिति के प्रधान श्री रियो जी दगड़जी, दोलास अपने भाषण में संयोजकों द्वारा उठाए गए। कष्टों का उल्लेख पहले ही कर चुके हैं। मैं सभा की स्वागत समिति का आभारी हूं जिन्होंने इस सभा के आयोजन में कड़ा परिश्रम व प्रयास किया।

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केवल महारों की सभा क्यों?

कुछ लोग आपत्ति कर सकते हैं कि केवल महारों की सभा क्यों बुलाई गई? अगर धर्म परिवर्तन की घोषणा सभी अछूतों के लिए है तो सब अछूतों की सभा क्यों नहीं बुलाई गई? सभा के सामने विषयों पर विचार-विमर्श करने से पहले मैं इन प्रश्नों के उत्तर देने के लिए प्रतिबद्ध हूं। यहां पर केवल महारों की सभा बुलाने के पीछे कई कारण हैं। पहले इस सभा के लिए हमने न ही सरकार से संरक्षण की मांग की है और न ही हिन्दुओं से सामाजिक अधिकारों की मांग उठाई है। सभा के सामने केवल एक प्रश्न है, ‘‘हम अपने जीवन को सफल बनाने के लिए क्या करें ? हम अपने जीवन के भविष्य के रास्ते को कैसे तराशें? इस प्रश्न का हल संभव है और प्रत्येक जाति को अलग-अलग अपनी समस्या का हल निकालना आवश्यक है। यही कारण है कि मैंने सभी अछूतों की सभा एक साथ नहीं बुलाई।