29. 31.5.1936 मुक्ति का मार्ग क्या है? - Page 131

110 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

केवल माहरों की सभा बुलाने का एक कारण और है । मैंने लगभग दस महीने पहले घोषणा की थी। इस कार्यकाल में लोगां की चेतना जगाने के पर्याप्त प्रयत्न हुए। मुझे लगा कि लोगों की राय जानने का सही समय आ गया है। मेरे अनुसार राय जानने का सरल उपाय अलग-अलग जाति की अलग सभा करना है। धर्म परिवर्तन की घोषणा करने के लिए लोगों की राय समझना आवश्यक हैं। और मुझे विश्वास है कि अछूतों की एक आम सभा बुलाने की अपेक्षा प्रत्येक जाति के लोगों की अलग-अलग सभा कार्यान्वित सभी अछूतों की वास्तविक राय जानने के लिए अधिक भरोसेमन्द होगी। इस तरह की सर्वजाति सभा की राय चाहे सभी अछूतों की राय कही जाए परन्तु सभी अछूत जातियों की प्रतिनिधि राय नहीं होगी। इस तरह की दुविधा से निपटने तथा लोगां की विश्वस्त राय जानने के लिए ही केवल महार जाति की सभा बुलाई गई। यद्यपि दूसरे समुदाय इसमें सम्मिलित नहीं है, इससे उनकी हानि नहीं है। अगर उनमें धर्म परिवर्तन की इच्छा नहीं है तो उनको इस सभा में सम्मिलित न होने के पश्चाताप का कोई कारण नहीं होना चाहिए। अगर वे सभी हिन्दू धर्म को छोड़ने के इच्छुक हैं और उनके रास्ते में ऐसी कोई रुकावट नहीं कि उन्होंने इस सभा में भाग नहीं लिया है शेष समुदाय के अछूत लोग स्वतंत्र तौर पर अपनी जाति सभाएं और अपनी राय जग जाहिर करें। मैं उनको सलाह देना चाहूंगा कि इस तरह की सभाओं में मैं जितना हो सके सचमुच मदद करने के लिए तैयार रहूंगा, इतना परिचय बहुत है। अब मैं मुख्य विषय पर आता हूं,। एक आम आदमी के लिए धर्म परिवर्तन जितना अधिक महत्वपूर्ण है, समझना उतना ही कठिन है। इस धर्म विषय पर आम आदमी को संतुष्ट करना आसान काम नहीं है। अतः आप लोगों के पूर्णतया आश्वस्त हुए बगैर धर्म परिवर्तन को कार्यान्वित करना जोखिम भरा है। मैं इस विषय को सुगम से सुगम तौर पर अपने स्तर पर समझाऊंगा।

धर्म परिवर्तन का भौतिक दृष्टिकोण
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धर्म परिवर्तन विषय को सामाजिक और धार्मिक, भौतिक और अध्यात्मिक दृष्टिकोण दो पहलुओं से दृष्टिगत करना चाहिएः- चाहे जो भी रहा हो या सोचने की कोई भी धारा हो पहले अस्पृश्यता की प्रकृति व इसके चलन को समझने की आवश्यकता है। इसके समझे बिना मेरी धर्म परिवर्तन की घोषणा के निहित वास्तविक अर्थ को स्पष्ट रूप से समझने में आप अक्षम रहेंगे। अस्पृश्यता की स्पष्ट जानकारी व जीवन में चलन के लिए में आपको दी गयी यातनाओं तथा ज्यादत्तियों की कहानियों के स्मरण की सलाह दूंगा। उदाहरण स्वरूपख् सवर्ण हिन्दू द्वारा साधारण कारणों के लिए पिटाई जैसे कि आपके बच्चों को सरकारी स्कूल में जाने का अधिकार का दावा या सार्वजनिक कुएं से पानी निकालने का अधिकार का दावा या शादी के